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शहर से नहीं जाएंगे बाहर, शुल्क देने को तैयार

Sat, 08 Jun 2019 04:43 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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डेयरी संचालक एसोसिएशन के पदाधिकारी प्रशासन के विरोध में एकता दिखाते हुए। - फोटो : डेयरी संचालक एसोसिएशन के पदाधिकारी प्रशासन के विरोध में एकता दिखाते हुए।
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मेरठ। डेयरियों को शहर से बाहर करने के हाईकोर्ट के आदेश से डेयरी संचालक परेशान हैं। अब वह दो साल पहले नगर निगम की ओर से बनाए गए प्रस्ताव पर भी अमल करने को तैयार हैं। डेयरी संचालक एसोसिएशन ने प्रस्ताव रखा है कि उनको कैटल कॉलोनी विकसित होने तक शहर से बाहर न निकाला जाए। भले ही प्रत्येक पशु पर 100 रुपये मासिक शुल्क रख लिया जाए। इससे निगम की आय भी बढ़ेगी और शहर के नालों में गोबर भी नहीं जाएगा।
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  हाईकोर्ट ने डीएम और नगरायुक्त को 30 जून तक सभी डेयरियों को नगर से बाहर करने के आदेश दिए हैं। इस संबंध में निगम प्रशासन ने 11 जून से अभियान चलाने की बात कही है। शुक्रवार को डेयरी संचालक एसोसिएशन ने माधवपुरम स्थित एक मंडप में सभा की। यहां एसोसिएशन के अध्यक्ष महेन्द्र सिंह उपाध्याय ने कहा कि हम हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन करने को तैयार हैं, लेकिन कैटल कॉलोनी विकसित की जानी चाहिए। अगर प्रशासन कैटल कॉलोनी के लिए भूमि उपलब्ध कराता है तो डेयरियों को बाहर ले जाने में हम समय नहीं लगाएंगे। कैटल कालोनी विकसित होने तक हम प्रति पशु 100 रुपये मासिक शुल्क देने को तैयार हैं। यह प्रस्ताव कमिश्नर, डीएम, नगरायुक्त के सामने भी रख चुके हैं। अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। बैठक में असलम खान, प्रवेश त्यागी, मुकुल गुप्ता, कुशलपाल, अमरीश, राजू, पवन अरोड़ा, पवन आहुजा, बंटी आहुजा आदि लोग उपस्थित रहे।   

प्रतिवर्ष होगी छह करोड़ की आय  
शहर में 2200 से अधिक डेयरियां हैं। इनमें करीब 50 हजार पशु हैं। अगर प्रत्येक पशु पर 100 रुपये मासिक शुल्क भी लगाया जाता है तो हर माह निगम को 50 लाख रुपये की आय होगी। पूरे साल में 6 करोड़ रुपये का लाभ होगा। इस आय को डेयरियों से निकलने वाले गोबर को उठाने पर खर्च किया जाए तो नगर निगम प्रशासन को सफाई पर अतिरिक्त खर्च करना नहीं पड़ेगा। यह रकम डेयरी संचालकों की मांग के अनुरूप है। जबकि निगम प्रशासन शुल्क को बढ़ा भी सकता है।
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नालों में बहाया जाता है गोबर
शहर की 90 प्रतिशत डेयरियों से निकलने वाला गोबर नाली और नालों में बहाया जाता है। काफी परिवारों ने डेयरियों को नालों के किनारे संचालित कर रखा है। वह गोबर को सीधे नाले में बहा देते हैं। यही कारण है कि शहर का कोई नाला ऐसा नहीं है, जो गोबर के कारण चोक न हो।
 
नगर निगम ने बनाई थी यह योजना
- प्रत्येक डेयरी से गोबर उठाने पहुंचनी थी निगम की गाड़ी।
- गोबर उठाने पर होने वाले खर्च देना था डेयरी संचालकों को।
- डेयरियों से मिलने वाले गोबर से तैयार की जानी थी वर्मी कंपोस्ट।
- गोबर से गैस बनाने की भी थी योजना।

हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक शहर से डेयरियों को बाहर करना निगम की प्राथमिकता में शामिल है। सभी डेयरी संचालकों को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वह समय रहते डेयरियों को बाहर कर लें। 11 जून से अभियान चलाया जाएगा। अभी किसी दूसरे पहलू पर बात किया जाना संभव नहीं है।
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-मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त।
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