विभागों की लापरवाही का आलम यह रहा कि शहर को गौरव देने वाला सबसे ऊंचा तिरंगा ही उतर गया। सूरजकुंड में जिस तिरंगे को क्रांतिधरा में पूरे सम्मान के साथ फहराया गया था, वहां आज खाली पोल है। रखरखाव का पेमेंट न मिलने के कारण संबंधित कंपनी ने तिरंगा उतार लिया और लगभग एक महीने से किसी अधिकारी ने सुध नहीं ली है।
10 मई क्रांति दिवस पर सूरजकुंड पार्क में 41 मीटर ऊंचे पोल पर तिरंगा फहराया गया था। राष्ट्रीय ध्वज से सूरजकुंड पार्क की सुंदरता में चार चांद लग गए थे। रात्रि में लाइटों की रोशनी में तिरंगा जगमगाता था। इतना ही नहीं पार्क की भव्यता को देखने के लिए लोगों का जमावड़ा लगा रहता था। अब आलम यह है कि एक माह से लाइट बंद है तो पोल पर तिरंगा नहीं है। तिरंगा न होने पर स्थानीय लोगों में गंभीर नाराजगी दिखी। कुछ लोगों के विरोध के बाद मौके पर महापौर हरिकांत अहलुवालिया और पार्षद राजकुमार मुन्ना भी पहुंच गए।
कनाट पैलेस की तर्ज पर फहराया गया था तिरंगा
एमडीए ने दिल्ली के कनाट पैलेस में फहरे तिरंगे की तर्ज पर सूरजकुंड पार्क में तिरंगा फहराने का निर्णय लिया था। एक निजी कंपनी ने तिरंगे के लिए 41 मीटर ऊंचा पोल लगाया। इस पर 20 फीट लम्बा और 30 फीट चौड़ा तिरंगा फहराया गया था। इस पर 21 लाख रुपये की लागत आयी थी। सबसे पहली बार यह तिरंगा 10 मई 2016 को क्रांति दिवस के अवसर पर तत्कालीन डीएम पंकज यादव ने फहराया था। यह तिरंगा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से लैस था और टाइमर लगा होने के कारण तिरंगा 24 घंटे फहरता था। लाइटों की रोशनी में रात को तिरंगा जगमगाता था। अब बताया जा रहा है कि कंपनी को एमडीए द्वारा 16 लाख का पेमेंट न दिए जाने के कारण कंपनी ने तिरंगा उतार लिया और उसके बाद नहीं लगाया।