मेरठ। कैंट के नो एंट्री एरिया में सोमवार सुबह मासूम दो बच्चियों की ट्रक से कुचलकर हुई दर्दनाक मौत का कौन जिम्मेदार है, इसका जवाब देने के बजाय नौकरशाहों ने चुप्पी साध ली है। दोनों छात्राएं तो अपने रोजाना के रूट से स्कूल जा रही थीं। लेकिन कैंट बोर्ड की शनिवार आधी रात से शुरू हुई वाहन प्रवेश शुल्क की अव्यवस्था ने इन मासूमों की जान ले ली। यही नहीं, इस हादसे के बाद पीड़ित परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन कोई भी जिम्मेदार उनके आंसू पोंछने तक नहीं पहुंचा। इस हादसे को लेकर स्थानीय लोगों मेें जबरदस्त गुस्सा है। पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कैंट बोर्ड की इस अव्यवस्था पर कोई ऐतराज क्यों नहीं किया।
सोमवार सुबह के आठ बजे थे। गणपति विहार कंकरखेड़ा निवासी रिटायर्ड हवलदार छोटू सिंह की दोनों बेटियां अनु (16) और अंजली (12) स्कूल के लिए रोजाना की तरह स्कूटी से निकली थीं। बड़ी बेटी अनु कैंट स्थित सिटी वोकेशनल स्कूल में दसवीं की छात्रा थी जबकि छोटी बेटी अंजली पंजाब लाइन स्थित केंद्रीय विद्यालय में कक्षा पांच में पढ़ती थी। छोटा भाई अनुज केवी में पढ़ता है। अनु अपने छोटे भाई-बहन को स्कूटी से केवी में छोड़ती थी और फिर अपने स्कूल जाती थी। सोमवार को अनुज स्कूल नहीं गया था। स्कूटी जब 510 आर्मी वर्कशॉप के पास उमराव एंकलेव के सामने पहुंची तो पीछे से तेज रफ्तार आए रोडी से भरे ट्रक ने स्कूटी में जोरदार टक्कर मारी। दोनों बहनें सड़क पर गिरीं और ट्रक का पहिया दोनों का सिर कुचलता हुआ निकल गया। यह दर्दनाक हादसा जिसने भी देखा, उसकी रूह कांप गई। आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े तो आरोपी चालक ट्रक को छोड़कर वहां से भाग निकला।
मौके पर नहीं पहुंचा कोई अधिकारी
जिस जगह यह हादसा हुआ, वह सैन्य क्षेत्र है और प्राइवेट मालवाहक भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित है। इस गंभीर घटना में दो मासूम बेटियों की जान चली गई। लेकिन हादसे की सूचना के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर जांच करने तक नहीं पहुंचा। भले ही दोनों छात्राओं की मौत का जिम्मेदार अभी तक किसी को नहीं ठहराया गया हो। लेकिन लोग कैंट बोर्ड के वाहन प्रवेश शुल्क की व्यवस्था को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
खतरनाक मोड़ की तरफ जा रही व्यवस्था
कैंट बोर्ड के रुड़की और मवाना रोड सहित 11 मार्गों पर वाहन प्रवेश शुल्क वसूलने की अव्यवस्था का कई जगह विरोध हो रहा है। शनिवार आधी रात 12 बजे से जब यह शुल्क व्यवस्था लागू हुई तो रुड़की रोड और मवाना रोड सहित कई मार्गों पर रविवार तड़के तक भीषण जाम की स्थिति रही। सवाल है कि इतनी बड़ी व्यवस्था लागू करने से पहले कैंट बोर्ड और पुलिस-प्रशासन ने अव्यवस्था से निपटने के इंतजाम क्यों नहीं किए। अभी तक तो सवाल शुल्क वसूलने और जाम के उठ रहे थे लेकिन अब तो यह व्यवस्था खतरनाक स्थिति की तरफ जा रही है। छावनी क्षेत्र में ही कई प्रमुख स्कूल हैं जिनमें रोजाना हजारों छात्र-छात्राएं जाते हैं। इस हादसे के बाद सुरक्षा पर सवाल खडे़ हो रहे हैं। प्रवेश शुल्क से बचने के लिए भारी वाहनों के चालकों ने कैंट के नो एंट्री एरिया और दूसरे संकरे रास्तों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। सोमवार सुबह ऐसा ही हुआ। प्रवेश शुल्क से बचने के लिए चालक ने ट्रक को नो एंट्री एरिया में घुसा दिया। वहां से निकलने की जल्दबाजी में चालक ने ट्रक को बेकाबू दौड़ाया और दो बच्चियों को बेरहमी से कुचल डाला।
भगवान का शुक्र है... अनुज स्कूल नहीं गया
रिटायर्ड हवलदार छोटू सिंह की दो ही बेटियां थीं। परिजनों में कोहराम मचा है। परिजनों ने बताया कि रविवार को अनुज एक रिश्तेदार के यहां शादी में गया हुआ था। रात में देरी से आने के चलते सोमवार को वह स्कूल नहीं गया। दोनों बहनें स्कूटी से स्कूल गई थीं। भगवान का शुक्र रहा कि अनुज बहनों के साथ स्कूल नहीं गया। यह कहकर पिता छोटू सिंह और मां रिंकी बिलखने लगते हैं। शाम को पोस्टमार्टम के बाद दोनों बहनों के शव पहुंचे तो परिजनों में चीख पुकार मच गई।