मेरठ में काजल ने अपने ऊपर हुए जुल्म और बेटी के कोठा मालिक के पास बंधक होने की दास्तां 13 अक्टूबर को अफसरों को सुना दी थी। मगर इन नौ दिनों में पुलिस और प्रशासनिक अफसर मात्र बेटी का चेहरा दिखाने के अलावा कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा सके हैं। पुलिस अभी तक कोठे मालिक पर मामला दर्ज तक नहीं कर सकी है। काजल को इंसाफ और बेटी का इंतजार है।
कैसे बन गए फर्जी प्रमाण पत्र
सरकारी हाकिमों की घोर लापरवाही ने ही मां-बेटी के बीच की खाई को बढ़ाने का काम किया है। कोठे वाले राजू ने सेटिंग कर काजल की बेटी के फर्जी प्रमाण पत्र बनवा रखे हैं। जोकि मां-बेटी के डीएनए टेस्ट की प्रक्रिया में बाधा ला सकते है। पुलिस ने बताया कि बच्ची के जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और स्कूल समेत तमाम दस्तावेजों में कोठे वाले राजू और उसकी पत्नी ही काजल की बेटी के माता पिता दर्शाये हुए हैं। सवाल उठता है कि सरकारी हाकिमों ने बगैर जांच के कैसे काजल की बेटी के फर्जी प्रमाण पत्र बनने दिये। इसकी भी जांच हुई तो कई अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। कानून एक्सपर्ट कहते है कोठे वाला ही काजल की बेटी का असली गुनहगार है। अभी तक पुलिस का कदम उसको राहत देने वाला ही है। एक बच्ची की जिंदगी बर्बाद करने वाला राजू अभी तक खुला घूम रहा है। पुलिस का ध्यान मात्र काजल को उसकी बेटी तक मिलाने में सीमित है। जो कुछ काजल के साथ हुआ, उसके लिए पुलिस फिलहाल चुप ही है।
इस कहानी में अभी कई झोल
कोठे वाले के घर पर आठ साल की तीन बेटियां है। तीनों बेटियां की उम्र में दो-दो, तीन-तीन महीने का अंतर है। साफ है कि सब कुछ फर्जी है तो पुलिस अब किस बात का इंतजार कर रही है। राजू के घर पर काजल की बेटी के अलावा दो ओर अन्य बच्चियां किसकी है। इसका पता निकालने की जगह पुलिस चुप्पी साध गयी। देहलीगेट पुलिस कोठे वाले राजू के घर ईश्वरपुरी गई थी। पुलिस के सामने राजू ने कबूल किया था कि काजल की बेटी उसके पास है। काजल जिस बच्ची को अपनी बता रही थी, राजू उसे अपनी सगी बेटी बता रहा था। वह दूसरी बच्ची को काजल की बेटी बता रहा है। राजू ने बताया कि एक बेटी काजल की, दूसरी उसकी खुद की और दूसरी बेटी उसकी बहन की है। जिससे मामला ओर पेचीदा होता जा रहा है।
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