फिल्मी नहीं, असली है काजल (बदला हुआ नाम) की यह कहानी। इस कहानी में इतने टर्न और किरदारों के बदलते मुखौटे हैं, जिस पर आप आसानी से यकीन नहीं कर पाएंगे।
कहानी शुरू होती है सन् 2006 से। 13 साल की काजल कोलकाता में छठी कक्षा की छात्रा थी। दो भाई और एक बहन के साथ जिंदगी का सफर हंसी खुशी गुजर रहा था। पिता बीमार हुए तो घर की माली हालत गिरती चली गई। खाने के भी लाले पड़ने लगे। हंसने खेलने की उम्र में काजल पढ़ाई छोड़कर नौकरी करने की सोचने लगी। उसके पापा भी बेटी को उड़ता देखना चाहते थे। तमाम कठिनाइयों के बाद भी उन्होंने बेटी को स्कूल भेजना जारी रखा। हालात की मारी वह नौकरी की तलाश में घर से निकली तो उसे मेरठ में कोठे पर पहुंचा दिया गया। यहां से किसी तरह निकल तो गई, लेकिन अब वह कोठे से अपनी बच्ची को पाने की जद्दोजहद कर रही है।
मेरठ में दस दिन बाद पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने काजल (बदला हुआ नाम) के मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। सिटी मजिस्ट्रेट ने देहलीगेट थाना पुलिस से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। पुलिस का कहना है कि काजल जिस बेटी को अपनी बता रही, उसको कोठे वाला मानने को तैयार नहीं। दोनों ने डीएनए टेस्ट कराने पर सहमति जता दी है। पुलिस ने रिपोर्ट में डीएनए टेस्ट कराने की बात कही है।
एसओ देहलीगेट विजय गुप्ता के मुताबिक 13 अक्टूबर को कोलकाता की काजल ने डीएम ऑफिस में प्रार्थना पत्र लगाया था कि उसकी बेटी कोठे वाले राजू के पास है। मामला पुलिस तक पहुंचा तो वह काजल व उसके पति को लेकर कोठे वाले के घर पहुंची थी। जहां पर काजल को उसकी बेटी मिली थी। लेकिन एक ही उम्र की तीन बच्चियों को देखकर काजल हैरान हो गई। काजल ने सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ कोतवाली समेत कई अफसरों को शिकायती पत्र देकर अपनी बच्ची दिलाने की मांग की थी।
पुलिस ने बताया कि डीएनए टेस्ट की प्रक्रिया से ही पता चल पाएगा कि आखिर काजल की बेटी कौन सी है। डीएनए टेस्ट की प्रक्रिया के लिए पुलिस ने सिटी मजिस्ट्रेट को आख्या प्रस्तुत कर दी है। गौरतलब है कि कोठे वाले राजू ने काजल के सामने तीन बच्चियों को बुलाया था। डीएनए के बाद यह भी साफ हो जाएगा कि इनमें से राजू की कोई बच्ची है भी या नहीं।
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