पुराने शहर में जनसमस्याओं का अंबार लगा हुआ है। संकरी गलियां और सघन बाजार होने के कारण यहां लोगों को समस्याएं हैं। इसी कारण तमाम जनसुविधाओं का अभाव है। यहां के बाशिंदे कई बार मांग उठा चुके हैं, लेकिन इसका कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला। लोगों की मांग है कि इस क्षेत्र के भू उपयोग को बदला जाए। साथ ही यहां पार्किंग की समस्या को दूर किया जाए।
खैरनगर बाजार, घंटाघर, शहर सर्राफा, कागजी बाजार, नील की गली, वैली बाजार, बजाजा, पत्थर वालान, कोटला आदि मुहल्लों की कारोबार की दृष्टि से अपनी अलग पहचान है। यहां छोटी छोटी गलियां हैं। अधिकांश क्षेत्र सघन आबादी वाला है। अब इस क्षेत्र में हाल बुरा है। गलियां होने के कारण यातायात पूरी तरह से बाधित रहता है। चार पहिया वाहन तो भीतर नहीं जा सकते हैं। दोपहिया वाहन भी सही से नहीं निकाले जा सकते हैं। ऐसे में यहां के लोग कई बार यह मांग कर चुके हैं कि यहां भू उपयोग बदला जाए। इसका क्षेत्र आवासीय है, लेकिन यहां के लोगों का कहना है कि इसे मिश्रित किया जाए।
यह है लोगों की मुख्य मांग
लोगों का कहना है कि यहां व्यवसायिक और आवासीय क्षेत्र का स्पष्ट चिह्निकरण नहीं है। ऐसे में इस क्षेत्र में कुछ नियमों में छूट देना बेहद जरूरी है। जैसे मकान बनाते समय साइट बैक, सेट बैक आदि में छूट दी जाए। पार्षद विजय आनंद ने कहा कि इस बाबत बोर्ड बैठक में सवाल उठाया था। मंडलायुक्त और एमडीए वीसी को भी प्रस्ताव दिया गया था। उन्होंने कहा था कि यहां यह शर्त लागू की जा सकती है कि जो भी मकान बनाए वह अपने यहां पार्किंग करे। पार्किंग थोड़ा अंडर ग्राउंड हो सकती है। उसके ऊपर कॉमर्शियल तथा उसके ऊपर आवासीय भवन बनाया जा सकता है। नियमों से मुक्त करते हुए कुछ मॉडल बनाए जाएं। आगजनी की घटना होने पर फायर बिग्रेड की गाड़ियां भी मौके पर नहीं जा पाती है। हर नए निर्माण पर एक पावरफुल सबमर्सिबल लगाने की शर्त लगाने की मांग की गई थी।
वीसी कर चुके हैं भ्रमण
वीसी एमडीए योगेन्द्र यादव इस क्षेत्र का भ्रमण कर चुके हैं। वह यहां काम करने को लेकर सकारात्मक हैं। इस पर अभी और मंथन चल रहा है। इसके अलावा यहां आबचक की भी समस्या है। आबचक वह स्थान हैं जहां कई मकानों के पानी की निकासी होती है और यह स्थान खाली पड़ा होता है। अब यहां आबचक कूड़े से अटे हैं। वार्ड 51 में ही 55 आबचक हैं। उन्हें भी आवासों में ही शामिल करने की मांग की जा रही है।