फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

समर्थन मूल्य से भी 325 रुपये कम बिक रहा गेहूं

विज्ञापन
विज्ञापन
समर्थन मूल्य से भी 325 रुपये कम पर बिक रहा गेहूं
विज्ञापन

बिजनौर। नई फसल बाजार में आने से पहले गेहूं के दाम बढ़ जाते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है और समर्थन मूल्य से भी करीब 325 रुपये क्विंटल कम गेहूं का दाम चल रहा है। जिन किसानों ने भाव बढ़ने की आस में गेहूं को रोक लिया था, उन्हें अब नुक सान उठाना पढ़ रहा है। गेहूं की दाम कम होने की वजह कोरोना संक्रमण काल में सरकार द्वारा बांटा गया निशुल्क गेहूं बताया जा रहा है।
लॉकडाउन लगने के बाद से गिरा गेहूूं काभाव अब तक नहीं सुधरा है। गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपये क्विंटल है, लेकिन बाजार में 1650 रुपये प्रति क्विंटल तक में गेहूं बिक रहा है। जिले में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर जमीन में गेहूं बोया जाता है। गेहूं की खपत खुले बाजार के अलावा सरकारी क्रय केंद्रों पर होती है। इन पर एक अप्रैल से खरीद शुरू होती है। इस बार की खरीद के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं के दाम 1975 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किए हैं। अभी पिछले साल का गेहूं ही किसान बाजार में बेच रहे हैं, लेकिन इस पर भी किसानों को नुकसान ही उठाना पड़ रहा है। अगले महीने गाही होने पर बाजार में नई फसल आएगी। उस समय भी गेहूं के भाव सही मिलने की उम्मीद नहीं है।
विज्ञापन

खुले बाजार में नहीं पहुंचा गेहूं
सब्जी व फल कमीशन यूनियन मंडी अध्यक्ष शमशाद अंसारी के अनुसार कोरोना के समय किसान बाजार में माल नहीं बेच पाए। जनता के पास राशन की दुकानों से अनाज आ गया। बाद में किसान गेहूं बेचने बाजार पहुंचे तो गेहूं का बाजार बहुत कम रह गया था। इसलिए गेहूं के दाम कम चल रहे हैं। व्यापारी गेहूं खरीद भी ले तो ज्यादा बिक्री नहीं है।
राशन लेने वालों ने भी बेचा गेहूं
उपमन्यु फ्लोरमिल के प्रोपराइटर विपुल शर्मा के अनुसार कोरोना के समय सरकार ने दो -दो बार गेहूं बांटा। तब राशन लेने वाले काफी लोगों ने खुद ही बाजार में अनाज बेचा। किसानों ने सीजन में गेहूं का स्टॉक ज्यादा कर लिया। इस वजह से नवंबर के बाद भी गेहूं के रेट नहीं बढ़े हैं।
कोट
- सरकार जो रेट घोषित करे तो वे हवाई न हों। सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद न होने की वजह से बाजार में रेट गिरते हैं। इस बार किसान एमएसपी पर ही फसल बेचेगा। दिगंबर सिंह, भाकियू की युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष
विज्ञापन

- किसान एमएसपी पर फसल बिकने के कानून की गारंटी मांग रहे हैं, लेकिन नहीं दी जा रही। किसानों को फसल की लागत के डेढ़ गुना मूल्य की एमएसपी पर खरीद की गारंटी मिलनी चाहिए। विजय सिंह, जिलाध्यक्ष भाकियू (अंबावता)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें