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भगवान से जो रिश्ता मानोगे, वही निभाएंगे प्रभु : उर्मिला दीदी

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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के प्रभु मिलन भवन में सत्यनारायण कथा का आयोजन
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कहा-शबरी बनकर देखो, परमपिता गोद में बैठाएंगे

माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। भगवान से आप जो भी रिश्ता जोड़ लें वे उसी रिश्ते को स्वीकार करते हैं और उसे पूरी तरह निभाते भी हैं। यह कोई कल्पना नहीं बल्कि आध्यात्मिक सत्य है। शबरी ने भी राम को केवल प्रभु नहीं बल्कि अपने प्राणनाथ और अपना सर्वस्व माना। फल चख चख कर दिए पर प्रभु ने उसी मां बेटे के रिश्ते को स्वीकार किया और उसे अपनी गोद में स्थान दिया।
यह बात माउंट आबू से पधारीं राजयोगिनी उर्मिला दीदी ने कही। वे प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के दिल्ली रोड स्थित प्रभु मिलन भवन में चल रहे पांच दिवसीय तनाव मुक्ति एवं शांति अनुभूति शिविर के तीसरे दिन सत्यनारायण कथा का आध्यात्मिक रहस्य एवं खुशी या तनाव स्वयं करें चुनाव विषय पर बोल रही थीं।
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उर्मिला दीदी ने ध्रुव चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि राजा उत्तानपाद की छोटी रानी सुरुचि का पुत्र उनकी गोद में था। बड़ी रानी सुनीति का पुत्र ध्रुव जब पिता की गोद में बैठने चला तो सुरुचि ने कठोर शब्दों में उसे अपमानित कर दिया। मासूम ध्रुव यह अपमान लेकर अपनी मां सुनीति के पास पहुंचा। मां ने उसे समझाया बेटा सांसारिक पिता की गोद क्षणिक है। तू परमपिता परमात्मा की गोद में बैठने योग्य बन। बस मां के इन शब्दों ने बालक ध्रुव के जीवन की दिशा बदल दी। उसने वन में कठोर तप किया और भगवान को केवल पिता के रूप में पुकारा। परमात्मा ने उस बाल साधक को दर्शन दिए। गोद में बिठाया और आज भी ध्रुव तारा बनकर आकाश में चमक रहा है।
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तीसरे दिन का सत्र राजयोग ध्यान, आत्म-चिंतन और समूह चर्चा पर रहा। सैकड़ों लोगों भाव विभोर होकर दीदी के प्रवचन सुने। मंच संचालन सेवा केंद्र प्रभारी सुनीता दीदी ने किया। उन्होंने बताया कि शिविर का समापन 27 नवंबर को होगा।
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