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जमाने बाद जो देखा छलक गईं आखें....

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सुनील कैथवास....नौचंदी के पटेल मंडप में आयोजित मुशायरा में कविता सुनाते कवि हरिओम पवार और शामिल
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मेरठ। नौचंदी मेले के पटेल मंडप में नामचीन शायरों ने अपनी पेशकश से महफिल ही जमा दी। शायरों ने शानदार कलाम पेश कर श्रोताओं का दिल जीत लिया और जमकर तालियां बंटोरीं। कौमी एकता की एक शाम, 1857 की क्रांति के शहीदों के नाम मुशायरे में दिल, प्यार, मुहब्बत, वतन के साथ ही सामाजिक सरोकार पर भी शायरी पेश की गई।
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मुशायरे की सदारत शहर काजी डॉक्टर जैनुस सालिकीन ने की। मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं किठौर विधायक शाहिद मंजूर रहे। अंतरराष्ट्रीय कवि डॉ. हरिओम पंवार ने शमां रोशन की। मुशायरे में मुमताज नसीम ने सुनाया- ये कौन कहता है हम दिल बिछाए बैठे हैं, तुम्हारे नाम का दीपक जलाए बैठे हैं, जमाने बाद जो देखा छलक गईं आखें, समझ रहे थे उन्हें हम भुलाए बैठे हैं...। फारूक बक्शी ने कहा कि हम अपना खून जलाते हैं, शेर कहते है, किसी के इश्क पे दारोमदार थोड़े ही हैं, बारिशे अश्क दिल भी ले बैठी, कच्ची मिट्टी का था मकां अपना...।
रियाज सागर के संचालन में चले मुशायरे में इरशाद बेताब ने कहा-गम का अहसास भुलाया भी तो जा सकता है, जुल्मों दहशत को मिटाया भी तो जा सकता है...। वहीं, डॉ. तारिक कमर ने कहा कि जिस तरफ सब हैं उधर होना बड़ी बात न थी, कुछ तो उलझन है जो हम आके इधर बैठे हैं...। रियाज सागर ने पढ़ा मोहब्बत और वफााओं की कहानी छोड़ आते हैं, जहां जाते हैं हम, कोई निशानी छोड़ आते हैं...। वहीं, सिकंदर हयात ने काफी गुदगुदाया। उन्होंने फरमाया- इश्क का रोग है जो नींद उड़ा देता है, नौजवानों से करोगे तो सजा देता है, इश्क करना है तो हम जैसे बुजुर्गों से करो, पिलपिला आम ही खाने में मजा देता है...। मुशायरे में संयोजक शायर एडवोकेट इरशाद बेताब और हमख्याल फाउंडेशन का अहम योगदान रहा।
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कितनी कंजूसी पे आमादा है ससुराल मेरी...
मुशायरे में पॉपुलर मेरठी ने कहा कि कितनी कंजूसी पे आमादा है ससुराल मेरी, राज की बात बताते हुए डर लगता है, ऐसे कमरे में सुला देते हैं साले मुझको, पांव फैलाऊं तो दीवार में सर लगता है... एनमीम कौसर ने कहा कि फिर मसाफत मेरे कदमों से लिपट कर रोई, पेट की आग ने जब पांव के छाले देखे...। बाराबंकी से आए अली ने पढ़ा कि किसी की आंख के आंसू मुझे वापस बुलाते हैं, मुझे परदेस की अब रोटियां अच्छी नहीं लगती, वही अल्लाह की रहमत से बस महरूम होते हैं, जिनको अपने घर में बेटियां अच्छी नहीं लगती। इनके अलावा चांदनी शबनम, खुर्शीद हैदर, मंजर भोपाली, सहित अन्य ने कलाम पढ़े। इस अवसर पर लवी त्रिपाठी, डॉ. राकेश तूफान, शकील आजमी, चरण सिंह बक्श, नासिर रैफी, राकेश गौड़, नरेंद्र राष्ट्रवादी, अंकुर गोयल, यशपाल रहे।
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सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से मंत्रमुग्ध किया
- पटेल मंडप में स्कूली बच्चों का भी कार्यक्रम हुआ। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. मोनिका सिंह, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सरबजीत कपूर ने दीप प्रज्ज्वलन किया। रघुनाथ गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर निवेदिता कुमारी की अध्यक्षता में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। लोकगीत और एकल गीत प्रस्तुत किए गए। पीलो पीलो घाघरा... गीत पर रियांशी और मुस्कान ने लहराए मोरी चुनरिया पर प्रस्तुति दी। प्रगति अहलावत ने देश से है प्यार तो...गीत पर प्रस्तुति देकर रोमांचित किया। बाद बच्चों को प्रमाण पत्र दिए गए। इस अवसर पर अक्षय कुमार, डॉ. स्वाति शर्मा, हेमंत शुक्ला, डॉ. सुमन सिंह रहीं।
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों...
- म्यूजिकल एवं डांस कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन किया गया। जुनैद खान ने अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों... गीत पर प्रस्तुति दी। जूनियर अमिताभ मुकेश शर्मा और अफजल ने नृत्य प्रस्तुति से मन मोहा। अजरा खान ने आज की रात मजा हुस्न का आखों से लीजिए... गीत पर नृत्य किया। आरुषि ने मेरे ख्वाबों में जो आए... गीत सुनाया। संचालन अशरफ ने किया। संयोजक यूसुफ खान और जुनैद फारुखी ने अतिथियों को सम्मानित किया।
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