पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लिंग परीक्षण का काला कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। दो साल में 15 से अधिक मामले पकड़े गए हैं। हैरत की बात है कि इनमें से एक भी मामला यूपी की टीम ने नहीं पकड़ा है। हर केस के पीछे हरियाणा की टीम का रोल रहा है। उन्हीं की प्लानिंग ने लिंग परीक्षण करते हुए डाइग्नोस्टिक सेंटरों के मालिकों को रंगे हाथों पकड़वाया। पिछले सात साल में पश्चिमी यूपी के आठ-10 जिलों में लोकल टीम ने लिंग परीक्षण के खिलाफ कोई स्टिंग नहीं किया।
मेरठ की बात करें तो पांच बड़े मामले हरियाणा की टीमों ने पकड़े हैं, जिसमें सपा एमएलसी की बहन और बहनोई को रंगेहाथों पकड़वाया था। बागपत रोड, मोहनपुरी, मवाना व गढ़ रोड पर भी स्टिंग के जरिये लिंग परीक्षण के मामले पकड़े गए। बिजनौर, बागपत, शामली और सहारनपुर में 8-10 केस पकड़े गए हैं। यह सभी केस हरियाणा टीम की बदौलत खुले हैं। जिलाधिकारी के निर्देशन में यूपी में स्थानीय गठित जिला स्तरीय पीसीपीएनडीटी कमेटी कोई एक्शन नहीं ले रही है। जींद से लेकर सोनीपत की टीमें अल्ट्रासाउंड जांच के लिए ग्राहक तैयार करती है, उसके बाद पूरी प्लानिंग के साथ स्टिंग ऑपरेशन किया जाता है। दो साल में इनका कोई भी स्टिंग ऑपरेशन फेल नहीं हुआ है।
विभागों से मिल रहा संरक्षण
यूपी में स्थानीय स्तर की टीमों के फेल होने को लेकर तमाम सवाल उठते रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण स्वास्थ्य विभाग तक डाइग्नोस्टिक सेंटरों की गहरी पकड़ को माना जाता है। हर जिले में पीसीपीएनजीटी सेल गठित है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में सेल को संभालने वाले चिकित्सक व बाबू काफी पुराने हैं जो व्यक्तिगत तौर पर हर अल्ट्रासाउंड सेंटर के मालिक या चिकित्सक को जानते हैं। संबंधों के इसी खेल में आज तक पश्चिमी यूपी में कोई बड़ा स्टिंग ऑपरेशन नहीं हो पाया है। मेरठ में करीब सात-आठ साल पहले तत्कालीन जिलाधिकारी कामनी रत्न चौहान ने सख्ती दिखाई थी, जिसके बाद स्टिंग किया गया। उन्होंने स्वयं लिंग जांच होने के का मामला पकड़ा था। तब से कोई मामला पकड़ में नहीं आया।
टीम को स्टिंग करने का राइट
स्वास्थ्य विभाग को पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत लिंग जांच के मामले में स्टिंग करने का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का आपसी संबंधों के कारण कभी इस्तेमाल नहीं किया गया। ऐसे में साल दर साल पश्चिम यूपी में लिंग परीक्षण के मामले बढ़े जा रहे हैं और हरियाणा की टीमें कार्रवाई कर रही हैं। बीते महीने मंडलीय प्रशिक्षण केंद्र पर हुई पीसीपीएनडीटी की क्षेत्रीय कार्यशाला में कमिश्नर आलोक सिन्हा ने मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल की समीक्षा में दूसरे प्रदेश की टीम द्वारा कार्रवाई किये जाने पर रोष व्यक्ति किया था। उन्होंने कहा था कि जो काम दूसरे प्रदेश की टीमें आकर करती हैं, वह स्थानीय स्तर पर होना चाहिए।