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पश्चिम बंगाल से वाया मेरठ लुधियाना तक जाने वाले डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर लगा मुआवजे का ग्रहण 

Sun, 03 Mar 2019 10:54 AM IST
Dimple Sirohi दीपक भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ
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freight corridor
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पश्चिम बंगाल से वाया मेरठ, लुधियाना तक जाने वाले 1856 किमी के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के निर्माण कार्य पर ग्रहण लग गया है। किसानों ने मुआवजा बंटवारा में करीब 19 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के आरोप लगाकर जानी ब्लॉक के पांचली खुर्द से जाने वाले ट्रैक का काम रुकवा दिया है। यदि इसका हल जल्द नहीं निकला तो प्रोजेक्ट के समय से पूरा करने के दावों को झटका लगेगा। 

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यह है प्रोजेक्ट
रेलवे द्वारा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए खुर्जा से सहारनपुर के बीच 222 किलोमीटर लंबा ट्रैक डाला जाना है। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य साल 2021 तय किया गया है। इस परियोजना के शुरू होने के बाद मालगाड़ियों की रफ्तार तेज होगी। वहीं, एक से दूसरे स्थान तक सामान ले जाने में आसानी होगी।

खुर्जा से बुलंदशहर के बीच चल रहे इस कॉरिडोर का ट्रैक फाउंडेशन तैयार हो चुका है। अब इसकी शुरुआत मेरठ में की जानी थी। लेकिन मुआवजे में हुई गड़बड़ी के आरोपों पर किसानों ने कार्य को रुकवा दिया है। पिछले दिनों गांव में पहुंची एलएंडटी की टीम को ग्रामीणों ने कार्य करने से रोक दिया। एलएंडटी के इंजीनियर यहां बिजली के पोल लगाने के लिए लोकेशन तलाश रहे थे।

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2017 से चल रहा मामला
तत्कालीन कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार से किसानों ने शिकायत की थी, जिसके बाद मुआवजे में हुई गड़बड़ी का मामला सामने आया था। किसानों ने एक भाजपा नेता पर रेलवे द्वारा जमीन अधिग्रहण कराकर मुआवजा लेने का आरोप लगाया था। पांचली खुर्द गांव में खसरा नंबर 166, 334 और 335 में घोटाले के आरोप लगाए गए। इसके बाद कमिश्नर ने मामले की जांच करते हुए लेखपाल और कानूनगो पर एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे। लेकिन कमिश्नर का तबादला होने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।  

फिर बनाई गई कमेटी
3 जनवरी 2019 को वर्तमान कमिश्नर अनीता. सी. मेश्राम ने इस मामले में कमेटी बनाकर जांच करने के आदेश दिए थे। इसकी जांच अपर आयुक्त और एडीएम एलए को सौंपी गई हैं। हालांकि यह मामला विजिलेंस भी पहुंच गया है। इसकी फाइनल रिपोर्ट नहीं पहुंची है। जिससे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। 

अपर आयुक्त को किसानों ने लिखा पत्र
किसानों ने अपर आयुक्त को लिखे पत्र में खसरा नंबर से घोटाले का विवरण लिखा है। किसानों का आरोप है कि खसरा नंबर 166, 334 और 335 में मालिका हक हमारा है लेकिन भूमाफियाओं के साथ अधिकारियों ने मिलीभगत कर करोड़ों रुपये का मुआवजा बांट दिया है। जबकि रेलवे की ओर से हमारे खाते खुलवाए गए थे। 

तो मुआवजा दिलाएंगे
इसके लिए कमेटी बनाई गई थी। अगर कार्य रुका है तो इसे दिखवाया जाएगा। किसानों को मुआवजा अगर नहीं मिला है तो उन्हें दिलाया जाएगा।- अनीता सी. मेश्राम, कमिश्नर

इन राज्यों से गुजरना है ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर 
पंजाब -
88 किमी
हरियाणा - 72 किमी
उत्तर प्रदेश - 1058 किमी
बिहार - 239 किमी
झारखंड - 196 किमी
पश्चिम बंगाल - 203 किमी

मेरठ में यहां से गुजरना है डीएफसी
सहारनपुर की तरफ से आते हुए सकौती टांडा, पावली खास, मेरठ सिटी, कैली होते हुए हापुड़ पहुंचेगा। जहां से वह दादरी होते हुए बुलंदशहर जिले के खुर्जा तहसील पहुंचेगा। 
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यह मिलेगा लाभ
कोलकाता ये यह सामान आएगा
पावर हाउस कोयला - 61.96 टन प्रतिवर्ष
कोयला - 0.95 टन प्रतिवर्ष
स्टील - 9.74 टन प्रतिवर्ष
अन्य सामान - 2.96 प्रतिवर्ष

पंजाब की तरफ से चलने पर यह सामान आएगा
फर्टिलाइजर - 0.42 टन प्रतिवर्ष
सीमेंट - 1.52 टन प्रतिवर्ष
नमक - 1.03 टन प्रतिवर्ष
अन्य सामान - 2.96 टन प्रतिवर्ष 

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