वहीं शुक्रवार को साहिबा कब्रिस्तान के पास से उपले लेने गई थी। उसका कहना है कि उसे यूसुफ की कब्र से आवाज सुनाई दी। उसने घर पहुंचकर परिजनों को बताया। परिजन यूसुफ के घर पहुंचे और उसके पिता गाजूद्दीन और भाई यामीन को कब्र से आवाज सुनाई देने की जानकारी दी। मृतक के परिजन कब्र पर पहुंचे। बाद में अन्य ग्रामीणों की भीड़ लग गई। ग्रामीणों ने कब्र खोदने के लिए कहा। लेकिन परिजन नहीं माने। परिजनों ने मेरठ में भी मौलानाओं से बात की।
धार्मिक गुरुओं ने परिजनों को बताया कि ऐसा नहीं होता है। लेकिन इसके बाद भी अगर कब्र से दोबारा आवाज आती है तो कब्र खोद सकते हैं। ग्रामीण और परिजन देर शाम तक कब्र के पास बैठे रहे। मगर उन्हें कोई आवाज सुनाई नहीं दी। कुछ ग्रामीण इसे सिर्फ अंधविश्वास बता रहे हैं।
वहीं, ग्राम प्रधान जय भाटी ने बताया कि कब्र खोदने का फैसला मृतक के परिजनों को लेना है। यदि वह ऐसा करने को कहेंगे तो कब्र खोदकर दिखवाया जाएगा।
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