शासन के आदेश पर प्रदूषण फैलाने, हेलमेट न लगाने वाले चालकों के खिलाफ अभियान चल रहा है। लेकिन शहर में जाम में मुख्य भूमिका निभाने वाले जुगाड़ वाहनों का कुछ नहीं बिगड़ने वाला। न कागज हैं, न डीएल और प्रदूषण भी धडल्ले से फैला रहे हैं। आखिर क्यों है पुलिस और आरटीओ इन पर मेहरबान। पुलिस भी मानती है कि ये वाहन पूरी तरह अवैध हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर आज तक कुछ नहीं हुआ। स्कूटर, बाइक के इंजन से तैयार किए जा रहे जुगाड़ में ना कोई सुरक्षा मानक हैं और न ही ब्रेक आदि की उचित व्यवस्था। नतीजा ये कि सड़क पर चलने वाले लोगों के लिए ये जुगाड़ खतरा बने हुए हुए हैं। नवीन मंडी के सामने जुगाड़ से टकराकर पिछले सप्ताह दो लोग गंभीर रूप से घायल भी हो गए थे।
शहर में अवैध टेंपो, ई-रिक्शा और बैल बुग्गी समेत ओवरलोड जुगाड़ वाहन भी जाम का मुख्य कारण हैं। नो टेंपो जोन में पुलिस अभियान शुरू होने के एक या दो दिन में सुस्त पड़ने लगता है। ट्रैफिक पुलिस और होमगार्ड वाहनों के कागज चेक कर चालान काटने में लगे रहते है। पुलिस, नगर निगम, आरटीओ व एमडीए विभाग जिम्मेदार हैं। एक दूसरे के विभाग अपना पीछा छुड़ा रहे हैं। पुुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मेरठ में बैठते है, लेकिन वह भी मेरठ के रोजाना जाम से निजात देने के लिए कोई खास निर्णय नहीं निकाल पा रहे।
आखिर कहां पुलिस, शहर के चौराहों पर जाम
अगर आपको कार से शहर आना हैं तो आपके पास लंबा समय होना चाहिए। क्योंकि अधिकांश चौराहों पर लंबा जाम लगता है, कितना समय लग जाए कोई नहीं जानता। ट्रैफिक व्यवस्था खराब हैं, पुलिस को जाम से ज्यादा चालान करने की टेंशन है। बुधवार कई चौराहों पर भीषण जाम लगा, लेकिन पुलिस दूर तक नजर नहीं आई।
हापुड़ अड्डा चौराहा, लिसाड़ीगेट रोड और बेगमपुल से बागपत अड्डा चौराहे तक मानों रोजाना जाम से लोगों को लड़ना पड़ता हैं। बुधवार को हापुड़ रोड, दिल्ली रोड पर भीषण जाम से लगा। हापुड़ अड्डे चौराहे से भूमिया पुल तक सड़क पर अवैध तरीके से ऑटो खड़ा होने से जाम की स्थिति बनी रही। लोगों पुलिस को फोन करते रहे, लेकिन किसी को कोई फ्रिक नहीं हुईं। भैसाली बस अड्डे के पास रोडवेज सड़क पर खड़ी कर देते है और बेगमपुल तक जाम लग जाता है। ट्रैफिक पुलिस होती है, लेकिन बस हटवाने की हिम्मत नहीं करती।