फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हम भाग्यवान हैं भगवान नहीं, जो दोषों का आंकलन करें

विज्ञापन
भक्तामर विधान में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु। - फोटो : MAWANA
विज्ञापन
हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ में सोमवार को 11वें दिन विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ हुआ।
विज्ञापन

सोमवार को सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य अशोक कुमार पापडीवाल, स्वर्ण कलश से अभिषेक आगोश व आर्णव पापडीवाल और शांतिधारा सलिल जैन को प्राप्त हुआ। दीप प्रज्ज्वलन अंतिमा, नूपुर ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। इस मौके पर 101 परिवारों की ओर से विधान कराया गया। भक्तामर पाठ का शुभारंभ रेखा जैन ने संस्कृत भाषा में किया। विनोद एंड म्यूजिक पार्टी कह धुनों पर नेहा जैन, रिया जैन ने भजन प्रस्तुत किए। गुरुवर निर्वाणभूषण जी ने कहा कि संत एक किसान के समान होता है किसान बीज बोने के बाद पानी व खाद्य देकर उस वृक्ष को सुरक्षित रखता है। उसी प्रकार संत श्रावक में धर्म का बीज बोता है, उसके चरित्र का निर्माण करता है और धर्म आदेश देकर उसकी रक्षा करता है। बुरा या अच्छा, सब स्वयं पर निर्भर है’ हम स्वयं के स्वामी हैं जैसा हम चाहे वैसा निर्माण कर सकते हैं । हम भाग्यवान तो हैं परंतु भगवान नहीं, जो दूसरों के दोषों का मूल्यांकन करें। स्वयं को सुधारो जग अपने आप सुधर जाएगा। विधान विसर्जन सलिल जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन सुमति प्रकाश जैन ने किया। चौबीसों भगवान की आरती का दीप गुरुकुल के छात्रों ने जलाया। प्रश्नमंच के विजेताओं को विपिन जैन द्वारा पुरस्कृत किया गया। इस मौके पर मुकेश जैन, मनोज जैन, राजीव, सुभाष, प्रेम जैन, विपिन शर्मा, विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, सह संयोजक मोतीलाल जैन, शशांक जैन, प्रवीण जैन, जितेंद्र जैन व शशांक जैन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें