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बिजनौर: गंगा नदी में नाव समेत 28 लोग डूबे, एक महिला का शव निकाला, 10 लापता

Fri, 24 Aug 2018 09:47 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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मौके पर जमा भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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यूपी में बिजनौर जिले के मंडावर थाना क्षेत्र में उफनती गंगा के पार खेतों से पशुओं के लिए चारा लेकर आ रहे गांव राजारामपुर के किसानों की नाव गंगा की बीच धार में पलट गई। नाव में सवार सभी 28 गांव वाले गंगा की तेज धार में बह गए। 17 गांव वालों को बाहर निकाला गया, जबकि 10 ग्रामीण अब तक लापता हैं। एक महिला का शव गंगा से निकाला गया। 

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वहीं लोगों ने प्रशासन पर बहने वाले लोगों की खोज करने में जल्दबाजी न करने का आरोप लगाते हुए बैराज के तटबंध पर पहुंचे डीएम व एडीएम को खूब खरी खोटी सुनाई। प्रशासन का कहना है कि लापता गांव वालों को गंगा में ढूंढा जा रहा है।
 
मंडावर क्षेत्र के खादर के गांव डेबलगढ़ (राजारामपुर) के गांव वालों की अधिकतर जमीन गंगा नदी की दूसरी ओर है। पहाड़ों पर बारिश से उफन रही गंगा की धाराओं के बीच शुक्रवार को गांव वाले चारा लेकर दोपहर करीब 12:30 बजे नाव से लौट रहे थे। नाविक सहित नाव में 28 गांव वाले सवार थे। इनमें महिलाएं भी थीं। सभी ने चारा भी नाव पर ही रख रखा था। गांव चाहड़वाला के सामने गंगा की बीच धारा में अचानक तेज लहर आने से नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। नाव में सवार सभी लोग गंगा की तेज धारा में बह गए। कुछ किसान तैरकर आ रहे थे। किसानों को आता देख गंगा किनारे मौजूद लोगों ने गंगा में कूदकर उन्हें बाहर निकाला।

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उफान पर कोटवाली नदी - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने अन्य लोगों को घटना के बारे में बताया। कई लोग गंगा किनारे जमा हो गए। धार में बहकर अन्य लोगों को आते देख, ग्रामीणों ने कूदकर उन्हें भी बाहर निकाला। इस तरह 17 लोगों को बाहर निकाला गया। उन्होंने बताया कि नाव में नाविक सहित 28 लोग सवार थे। गंगा में बहे अधिकतर लोग किसी तरह तैरकर घटनास्थल से सात किलोमीटर दूर गांव रावली के पास गंगा की धारा से बाहर आए। नाव से लापता किसानों की तलाश में गोताखोरों व गांव वालों को लगाया गया। मौके पर पहुंचे डीएम अटल कुमार राय व एडीएम वित्त एवं राजस्व अवधेश मिश्र का गांव वालों ने गंगा बैराज के तटबंध पर गांव नरौल्लापुर गुरुद्वारे के पास घेराव किया। लोगों ने डीएम को खूब खरी खोटी सुनाई। कहा कि प्रशासन उनकी कोई मदद नहीं कर रहा है। हादसे के करीब तीन घंटे के बाद रावली के पास गंगा से नागिनी (45) पत्नी जय सिंह का शव मिला है। 

ये लोग निकाले गए बाहर 
सूबे सिंह, वेदपाल, मूलचंद, नेत्रपाल, ज्योति, रामवती, शारदा, झोरी, कमलेश, संतोष देवी, रामेंद्र, आकाश, सुशील, शीशपाल, सरोज, सोजवीर, जेहरी गंगा की धारा में बहे। इन्हें निकाल लिया गया है। इनमे ज्योति, सरोज व रामवती को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 

ये हैं लापता 
मीना, रिया, कुसुम, भूरिया, परवेश, अमिता, सुनीता समेत दस किसान लापता हैं।

उधर, उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश से कोटावाली नदी भी उफान पर है। यहां शुक्रवार को भारी वाहनों का आवागमन बंद कर दिया है। इस दौरान तेल का एक खाली टैंकर पानी के बहाव में बह गया। यही नहीं बल्कि टैंकर चालक समेत दो लोगों के डूबने की आशंका है। टैंकर में चार लोग सवार थे जिनमें दो को बचा लिया गया है। बताया गया कि टैंकर तीन किलोमीटर तक बह गया है। 

वहीं कोटावाली नदी के कटान से प्राथमिक स्कूल कोटावाली को खतरा उत्पन्न हो गया है। स्कूल की बाउंड्रीवॉल तक नदी कटान कर चुकी है। नदी में यदि एक-दो उफान और आते हैं तो प्राथमिक स्कूल का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। 

भागूवाला क्षेत्र से गुजरने वाली कोटावाली नदी में कई बार उफान आ चुका है। प्राथमिक स्कूल कोटावाली की ओर लगातार नदी कटान कर रही है। लगभग एक माह पूर्व स्कूल की बाउंड्री से 20 फीट के फासले पर नदी बह रही थी। एक माह के भीतर कई बार कोटावाली नदी के उफान से प्राथमिक स्कूल की बाउंड्रीवॉल तक नदी कटान कर चुकी है। पहाड़ों की वर्षा से जुड़ी कोटावाली नदी में यदि जल्द एक-दो उफान आते हैं तो प्राथमिक स्कूल की बाउंड्रीवॉल धराशाही होने के साथ स्कूल में प्रवेश कर जाएगी। प्राथमिक स्कूल कोटावाली में 62 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। मुख्य अध्यापक अमित कुमार का कहना है कि इस संबंध में बीईओ के माध्यम से शिक्षा अधिकारियों को अवगत कराया हुआ है। उन्हें बच्चों के सुरक्षित अध्ययन के प्रति जागरूक रहने के दिशा निर्देश मिले हैं।
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बाढ़ नियंत्रण विभाग के संज्ञान में कटान 
बीईओ ईशक लाल ने बताया कि बाढ़ नियंत्रण विभाग को पत्राचार के माध्यम से स्कूल की सुरक्षा के लिए प्रबंध को लिखा जा चुका है। कोटावाली नदी के स्कूल बाउंड्री के नजदीक आने के संबंध में भी बाढ़ नियंत्रण विभाग को सूचना भेजी गई है।  

क्षेत्र से ग्रामीण कर चुके पलायन 
कोट सराय के ग्रामीणों ने अपनी कोटावाली क्षेत्र में कृषि भूमि पर एक दशक पूर्व मकान बनाए थे। ग्राम पंचायत की भूमि पर भी आवासीय पट्टे किए गए थे। करीब 20 परिवार कोटावाली गांव में रहने लगे थे। लेकिन नदी के नहर के कहर से मकानों को नुकसान पहुंचने के चलते अधिकांश लोग अपने आशियाने नदी क्षेत्र से हटा चुके हैं।

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