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्लांट के तामम घपले घोटालों को दबाकर बैठा जल निगम

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प्लांट के कई घोटाले दबाए बैठा जल निगम
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मेरठ। उप्र जल निगम भोला की झाल पर बने 100 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में मिले कई घोटालों को दबाने में लगा है। भ्रष्टाचार का खुलासा होने के बाद भी प्लांट को संचालित कर रही दीवालिया फर्म मेसर्स प्रतिभा इंडस्ट्रीज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। जालसाली कर बनाई गई फर्म टीएल इंफ्रा के खाते में भुगतान किया जा रहा है। मुख्य अभियंता गाजियाबाद क्षेत्र ने निरीक्षण आख्या में प्लांट में सब कुछ ठीक बताया। वहीं मेरठ सिटीजन फोरम ने मामले को लेकर जल निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
शहर को गंगाजल उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को चलाने के लिए नगर निगम ने जल निगम की नागर कार्य इकाई के साथ अनुबंध किया है। नागर कार्य इकाई ने प्लांट संचालन का ठेका मेसर्स प्रतिभा इंडस्ट्रीज को दिया है। यह फर्म फरवरी 2019 में दीवालिया हो चुकी है। इसके बाद भी नागर कार्य इकाई और फर्म प्रबंधन जालसाजी कर बनाई गई फर्म टीएल इंफ्रा के खाते में भुगतान कर रही है। कागजों में मेसर्स प्रतिभा इंडस्ट्रीज को ही दिखाया गया है।
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मामले में मुख्य अभियंता गाजियाबाद जोन ने कोई कार्रवाई नहीं की। अमर उजाला में खबर छपने के बाद उन्होंने प्लांट का निरीक्षण किया, लेकिन रिपोर्ट ओके दी। ऐसे में सवाल उठता है कि मुख्य अभियंता फर्म और दोषी अधिकारियों को क्यों बचा रहे हैं। इस बारे में मुख्य अभियंता सर्वेश कुमार का कहना है कि उन्होंने फर्म का वित्तीय ऑडिट कराने का मांग पत्र प्रबंध निदेशक को भेजा है। वहीं से मामले में कार्रवाई होनी है।
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मेेरठ सिटीजन फोरम ने खोला मोर्चा
मेरठ सिटीजन फोरम ने जर्जर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। फोरम प्रतिनिधियों ने मुख्य सचिव नगर विकास और प्रबंध निदेशक जल निगम को शिकायती पत्र भेजा है। फोरम पूर्व में मेरठ पेयजल योजना पर सोशल ऑडिट रिपोर्ट कराकर सांसद राजेंद्र अग्रवाल को सौंप चुकी है। फोरम ने अपने पत्रों के साथ अमर उजाला में छपी प्लांट से संबधित खबरों की प्रतियां भी भेजी हैं।
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