मेरठ महानगर भले ही स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल नहीं हो पाया हो, लेकिन नगर निगम ने शहर को स्मार्ट बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। नगर निगम शहर में वाई-फाई से चलने वाले कैमरे लगाने की तैयारी कर रहा है। शहर के सभी मार्ग और चौराहे आधुनिक कैमरों से लैस होंगे। नगर निगम सिविल लाइन क्षेत्र से पायलेट प्रोजेक्ट की शुरूआत करेगा। इसमें अन्य विभागों का सहयोग भी लिया जाएगा।
25 फिट ऊपर लगाए जाएंगे कैमरे
कई बार शहर की सड़क चौराहों से कैमरे चोरी हो चुके हैं। इसलिए नगर निगम प्रशासन ने महानगर की सड़क किनारे खम्भों पर 25 फिट ऊपर कैमरे लगाने का निर्णय लिया है। 50 मीटर तक क्षेत्र कैमरे की जद में रहेगा।
कलेक्ट्रेट में बनेगा कंट्रोल रूम
- इन कैमरों का कंट्रोल रूम कलेक्ट्रेट में बनाए जाने का प्रस्ताव है। जिसको नगर निगम ऑपरेट करेगा। साथ ही जिला प्रशासन और पुलिस से भी एक एक सदस्य कंट्रोल रूम पर मौजूद रहेंगे। ताकि अपराधी और चोरी के वाहनों की सूचना प्रसारित होने पर उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई हो सके।
वाहन कैमरे में आते ही बताएगा मालिक का पता
कैमरे को ऐसे सॉफ्टवेयर से अपडेट किया जाएगा। जो कैमरे की नजरों में आने के बाद खासकर वाहनों की नंबर प्लेट से उसके मालिक और चोरी की स्थिति को बताएगा। ऐसे वाहन कैमरे में एक बार कैद होते ही उसकी पूरी रिपोर्ट कंट्रोल रूम पर होगी। दोबारा उस क्षेत्र में आते ही यह वाहन पुलिस को लोकेशन देना शुरू कर देगा। इससे अपराधिक गतिविधियों पर विराम लगेगा। यह तकनीकि दिल्ली में लगाए जा रहे कैमरों की तर्ज पर होगी।
दिल्ली की कंपनी से हुई है बात
दिल्ली की एक कंपनी से कैमरे लगाने के लिए वार्ता हुई है। कैमरों से अधिक कीमती और अपडेट साफ्टवेयर है। जो कैमरे के माध्यम से ऐसे वाहनों का पता भी करेगा जो चोरी के हैं। साथ ही अन्य अपराधिक घटनाओं पर भी प्रतिबंध लगेगा। - मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त।