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व्यापार संघ कार्यालय का ताला तोड़ने पर तनातनी

Sun, 02 Oct 2016 02:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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संयुक्त व्यापार संघ के निर्वाचित दोनों गुटों में मेट्रो प्लाजा स्थित संयुक्त व्यापार संघ का ऑफिस खोलने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। चाबी न मिलने की बात पर शनिवार को बिजेंद्र गुट ने ऑफिस का ताला तोड़ डाला। जिसको लेकर अध्यक्ष नवीन गुप्ता और महामंत्री अरुण वशिष्ठ ने एक-दूसरे पर आरोपों की बौछार कर दी।
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ये है विवाद की जड़
यह ऑफिस निवर्तमान कार्यकारिणी के कार्यकाल में मात्र एक बार ही खुला था। कई बार इसे लेकर आपस में विवाद हुआ। जीत के बाद महामंत्री अरुण वशिष्ठ ने कहा था कि अब सभी कार्य ऑफिस में ही होंगे और पहले नवरात्र में ऑफिस खोल दिया जाएगा। जिसके चलते अरुण वशिष्ठ, वरिष्ठ उपाध्यक्ष कमल ठाकुर, दलजीत सिंह, नीरज मित्तल, कोषाध्यक्ष पवन मित्तल, मंत्री संदीप रेवड़ी और राजीव गुप्ता काले आदि ने ताले तुड़वाकर संघ ऑफिस खुलवा दिया। जिस पर विवाद हो गया।

आमने
अरुण वशिष्ठ :
न चाबी दी और न जवाब : हमने व्यापारियों से पहले नवरात्र पर ऑफिस खोलने का वादा किया था। मैंने 28 सितंबर को नवीन गुप्ता को कॉल कर चाबी मांगी तो उन्होंने चाबी निवर्तमान महामंत्री संजय जैन के पास बताते हुए कहा कि 29 सितंबर को चाबी उनसे लेकर दे देंगे। 30 को भी नवीन का कोई फोन नहीं आया। मैंने इस दौरान नवीन को करीब एक दर्जन कॉल की, लेकिन उन्होंने जवाब तक नहीं दिया। कोई दिक्कत थी तो वह फोन करके बता सकते थे कि चाबी इस कारण से मिलने में देरी हो रही है। लेकिन उन्होंने न चाबी दी और न फोन किया।
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एकजुटता तो तब मानी जाती: नवीन अब एकजुटता टूटने और गलत संदेश की बात कर रहे हैं तो चुनाव परिणाम के बाद यह सोच कहां गयी, जब वह अपने पैनल के पदाधिकारियों को लेकर ही स्वागत समारोह में शामिल होने पहुंच गये। एकजुटता तब मानते जब वह स्वागत करने वालों से कहते कि महामंत्री से बात कर समय तय कर लो, ताकि दोनों गुट एक साथ इस समारोह में शरीक हो जाते। रही बात भविष्य की एकजुटता की तो ऑफिस व्यापार संघ की गतिविधि विधिवत संचालन के लिए खोला गया है, कोई एकजुटता तोड़ने के लिए नहीं। अब तमाम गतिविधियां किसी के घर या होटल नहीं बल्कि कार्यालय से संचालित होंगी।

सामने : नवीन गुप्ता
इंतजार कर लेते तो क्या हो जाता : चुनाव परिणाम के अगले ही दिन अरुण वशिष्ठ द्वारा चाबी मांगने पर मैंने कहा था कि कल संजय जैन से लेकर चाबी दे देंगे। अगले दिन संजय का फोन न उठने और बात न होने के कारण चाबी नहीं आ सकी। अरुण वशिष्ठ का फिर फोन आया तो मैंने कहा कि बात करके चाबी मंगाता हूं। संजय से 30 की रात बात हुई और उन्होंने शनिवार को चाबी देने के लिए कह दिया। लेकिन शनिवार सुबह ही उनकी पुत्रवधू को पुत्र हुआ है। इसी व्यस्तता में वो चाबी नहीं दे पाये। ऐसे में अरुण अगर एक दिन और इंतजार कर लेते तो क्या चला जाता।
दबंगई पर उतर आया बिजेंद्र गुट : ऑफिस का इस तरह ताला तोड़ना दबंगई के साथ व्यापार संघ की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। इससे व्यापारी हितों की लड़ाई पीछे चली जाएगी और व्यक्तिगत हित आड़े आ जाएंगे, जो गलत होगा। हम व्यापारी हितों के लिए चुनाव जीते हैं, इसलिए बिजेंद्र पैनल के पदाधिकारियों से निवेदन करते हैं कि एकजुटता बनाने में सहयोग दें।
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