चुनाव प्रबंधन के लिए पहचान रखने वाली भाजपा इस बार नगर निगम चुनाव मेें मतदान के दिन हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल नजर आयी। अपनी ही सरकार में वोटर लिस्ट में जिस कदर गड़बड़ी नजर आयी, उसे लेकर अब भाजपाई माथा पीटते नजर आ रहे हैं। निगम चुनाव को लेकर भाजपा से स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि प्रांतीय स्तर पर भी इसमें भारी चूक हुई।
संगठन स्तर पर नहीं हुई चुनाव की तैयारी
नगर निगम चुनाव को लेकर भाजपा उत्साहित तो नजर आ रही थी। लेकिन तैयारी के नाम पर सिर्फ हवा हवाई बातें थीं। चुनाव में उतरने के लिए सबसे जरूरी चीज मतदाता सूची पर भाजपाइयों का कोई ध्यान नहीं गया। सपा शासन में जब वार्ड परिसीमन का काम शुरू हुआ तो उससे पहले मतदाताओं का सर्वे करार सूची तैयार करने का काम चला। लेकिन इसमें नगर निगम कर्मचारियों ने जो खेल किया, उसका खुलासा बुधवार को मतदान के दिन हुआ।
वोटर लिस्ट से गायब हो गईं पूरी कालोनियां
नगर निगम कर्मचारियों ने वर्ष 2002 की मतदाता सूची पर काम शुरू किया। सर्वे करने के बजाय घर बैठे पूरा काम हो गया। जिसमें नई कॉलोनियां जैसे आकांक्षा हाइट, न्यू देवपुरी, मित्तल नगर, जागृति विहार सेक्टर छह की कुंज विहार आदि जैसी दर्जन भर से ज्यादा छोटी-छोटी कॉलोनियाें के वोट गायब हो गए। जबकि जो लोग 15-16 साल पहले अपनी कॉलोनी बदलकर दूसरी जगह रहने चले गए, उनके वोट फिर से उसी कॉलोनी में नजर आए। ऐसे लोग अपनी वर्तमान कॉलोनी में वोट न होने पर मायूस होकर घर बैठ गए। जबकि उनके वोट पुरानी कॉलोनी की मतदाता सूची में निकले।
भाजपाइयों ने नहीं किया होमवर्क
भाजपाइयों ने चुनाव को लेकर संगठन स्तर से कोई काम नहीं किया। क्योंकि प्रत्याशी चयन में जहां प्रांतीय स्तर से देरी हुई तो स्थानीय संगठन स्तर पर वोटर लिस्ट को लेकर कोई होमवर्क नहीं हुआ। जिन पार्षद प्रत्याशियों ने अपनी पूर्व तैयारी के तहत वोटर लिस्ट पर ध्यान दिया, उनके यहां मतदाता सूची लगभग सही निकली। लेकिन जहां पैराशूट प्रत्याशी मैदान में उतरे, वहीं पर सबसे ज्यादा दिक्कत हुई।
बूथ मैनेजमेंट रहा पूरी तरह फेल
भाजपा का नारा एक बूथ-दस यूथ पूरी तरह फेल नजर आया। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में इसी बूथ मैनेजमेंट के जरिए सफलता हासिल करने वाली भाजपा निगम चुनाव में पूरी तरह फ्लॉप नजर आयी। यदि समय रहते गायब मतदाताओं को पुराने मतदाताओं के बूते खोज लिया जाता तो कुछ हद तक भाजपा का वोट बैंक बढ़ सकता था। लेकिन मतदान के दिन बूथ मैनेजमेंट नजर नहीं आया। यही नहीं जिन लोगों के वोट थे, उनको भी बूथ तक पहुंचाने में भाजपाई पूरी तरह सफल नहीं हो पाए।
विस्थापित मतदाताओं में भाजपा का वोट बैंक
शहर के विस्तार में पुराने शहर में रहने वाले लोग बाहरी कॉलोनियाें में आ गए। ऐसे लोगों के लोकसभा और विधानसभा के साथ पिछले निगम चुनाव में भी वोट थे। लेकिन मतदाता सूची में हुई कारगुजारी ने सारा खेल बिगाड़ दिया। अधिकांश वोट विस्थापित मतदाताओं के ही सूची से गायब थे। इन विस्थापित मतदाताओं में बड़ी संख्या भाजपा के वोट बैंक की है। मुस्लिम और दलित अभी उतनी बड़ी संख्या में विस्थापित नहीं हुआ है।
बीएलओ बोले, तहसील वालों की गलती
जहां एक-एक वोट निर्णायक हो, वहां मतदाता सूचियों का इस बार हाल यह रहा कि दो-चार नहीं बल्कि 15 सौ से दो हजार वोटें गायब मिलीं। ब्रह्मपुरी क्षेत्र की मतदाता सूचियों में यदि कहीं क्रम संख्या 490 है तो उसके बाद सीधे 550 से शुरू हो रही है। इसके बीच के वोट गायब हो गए। ऐसा कई मतदान केंद्रों पर होने की शिकायत मिली। मतदाता जब मतदान केंद्र पर मौजूद बीएलओ से उलझे तो बीएलओ ने साफ कह दिया कि यह गलती तहसील स्तर से हुई है। हम क्या करें। ब्रह्मपुरी में ही चावली देवी इंटर कॉलेज और ब्रह्मपुरी बाल अकादमी स्थित मतदान केंद्र पर मतदान करने से वंचित रहे लोगों ने कहा कि हम तो यहां नगर निगम, विधानसभा और लोकसभा चुनाव के वोट डालते आ रहे हैं। इस बार हमारे नाम ही वोटर लिस्ट से गायब कर दिए गए।