देश की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। मेरठ जिले में भी यह आंकड़ा 35 लाख के करीब है। जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए शासन और प्रशासन के पास कोई कारगर और सार्थक उपाय नजर नहीं आ रहा हैं। इस दिशा में जो योजनाएं हैं भी, उनका प्रभावी तरीके से क्रियांवयन नहीं हो पा रहा है। इन सबके बीच शहर में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो जनता को जागरूक करने के लिए दिन और रात एक किए हुए हैं। सड़कों पर घूमकर, नुक्कड़ नाटक खेलकर, पोस्टर चस्पा कर बस यही एक संदेश दे रहे हैं कि जनसंख्या को नियंत्रित किया जाए। इनके प्रयास ढुलमुल सरकारी तंत्र पर भारी पड़ रहे हैं। विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर प्रस्तुत है ऐसे ही लोगों के प्रयास को दर्शाती यह स्टोरी...
100 शहरों में पदयात्रा से जगाई जागरूकता की अलख
जनसंख्या नियंत्रण के प्रति लोगों को जागरूक करने की दिशा में दिल्ली रोड निवासी दिनेश तलवार अब तक 100 से अधिक शहरों में उल्टे चलकर पदयात्रा कर चुके है। संसद मार्ग पर भी वह उल्टे चलकर पदयात्रा कर चुके हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस बाबत उन्होंने कई बार चिट्टी लिखी है। जंतर-मंतर समेत कई शहरों में वह धरना दे चुके हैं। दिनेश तलवार का कहना है कि उनकी लड़ाई सरकार या नेताओं से नहीं बल्कि बढ़ती जनसंख्या से है। इसके लिए उन्होंने प्रदर्शन के तमाम तरीके अपनाएं हैं। इनकी लड़ाई में पत्नी दिशा और दो बेटियों ने भी हमेशा साथ दिया है।
वीडियो से मिली प्रेरणा
शास्त्री नगर निवासी गरिमा त्यागी पांच साल से जनसंख्या नियंत्रण के लिए लोगों को जागरूक कर रही हैं। वह शहर के तमाम शिक्षण संस्थानों में पहुंचकर छात्र-छात्राओं को इस दिशा में जागरूकता संदेश दे चुकी हैं। गरिमा का कहना है कि उन्हें इस अभियान की प्रेरणा यूट्यूब पर चीन की ट्रेन का वीडियो देखकर मिली। वीडियो में हजारों लोगों की भीड़ को जानवरों की तरह ट्रेन के डिब्बे में चढ़ते हुए देखा। गरिमा का कहना है कि मुझे लगा जनसंख्या पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो यही हाल होगा। यह बात 2011 की है। उसी दौरान देश जनसंख्या के नवीन आंकडे़ जारी हुए थे। मैने तभी सोच लिया कि इस दिशा में युवाओं को जागरूक करना होगा।
जनसंख्या के खिलाफ उठी आवाज
शारदा रोड निवासी ममता मित्तल सुरभि परिवार से जुड़ी हैं। वह पांच सालों से लोगों से शपथ पत्र भरवाकर जनसंख्या वृद्धि को रोकने का प्रयास कर रही हैं। उनका कहना है कि हमारी संस्था सभी शपथ पत्रों को प्रधानमंत्री कार्यालय में भेजती है। अब तक सैकड़ों की संख्या में शपथ पत्र भरे जा चुके हैं। उनका कहना है कि हारकर बैठने से कुछ नहीं होगा। लोग क्या कहतेे हैं मैं यह नहीं सुनती। बल्कि अपने काम में मग्न रहती हूं। अमूमन शनिवार और रविवार को संस्था सदस्यों के साथ मिलकर शपथपत्र भरवाए जाते हैं।
अभिनय बन गया जागरूकता का जरिया
सदर निवासी मुकेश शर्मा रंगकर्मी हैं। वह इप्टा, उप्टा सहित अन्य थिएटर समूहों से जुड़े हैं। मुकेश ने अपनी अभिनय कला को जागरूकता का जरिया बना लिया है। आठ साल से वह शहर के हर चौराहे, गली, कॉलोनी और सार्वजनिक स्थानों पर नाटक कर लोगों को बढ़ती जनसंख्या के दुष्परिणाम बता रहे हैं। जनसंख्या नियंत्रण के लिए वह 100 से अधिक नाटकों का मंचन कर चुके हैं। इस दिशा में वह कई नाटकों का लेखन भी कर चुके हैं। मुकेश कहते हैं फिल्मों में अभिनय का मौका नहीं मिलने पर उन्होंने अपने हुनर को समाज के लिए समर्पित कर दिया।
1987 से मना रहे जनसंख्या दिवस
विश्व में बढ़ती जनसंख्या के खतरे को भांपते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 1987 में पहली बार विश्व जनसंख्या नियंत्रण दिवस मनाने की घोषणा की थी। तब से हर साल 11 जुलाई को यह दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को बढ़ती जनसंख्या के दुष्परिणामों से अवगत कराना है। जनसंख्या के मामले में विश्व में चीन के बाद भारत का दूसरा नंबर है।