मेरठ में शासनादेश के अनुसार किसी भी सरकारी स्कूल के भवन का निजी इस्तेमाल नहीं होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कह चुके हैं कि शिक्षा विभाग के अधिकारी इस पर नजर रखें। लेकिन यहां तो निजी प्रयोग के बजाय शिक्षिकाओं ने सरकारी स्कूल ही किराए पर दे दिया है। उस पर बेटियों की सुरक्षा की भी कोई गारंटी नहीं है।
यह अव्यवस्था भगत सिंह मार्केट (हापुड़ अड्डा चौराहा) स्थित जूनियर बेसिक प्राथमिक पाठशाला बैरून सोहराब गेट नगर क्षेत्र में है। इस प्राथमिक विद्यालय में करीब 45 बच्चे हैं। जिसमें 20-25 बच्चे ही स्कूल आते हैं। स्कूल में प्रथम और द्वितीय तल पर कमरे बने हैं। लेकिन शिक्षिकाओं ने सभी बच्चों को एक ही कमरे में बैठाने की व्यवस्था कर रखी है। कभी-कभी बच्चों को द्वितीय तल पर भी पढ़ाया जाता है। लेकिन भूतल पूरी तरह खाली पड़ा रहता है।
बाजार का उठाया फायदा
दरअसल भगत सिंह मार्केट पूरी तरह से व्यावसायिक है, तो स्कूल के बाहर ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है। जिसका फायदा स्कूल की शिक्षिकाओं ने उठाया है। स्कूल के आसपास के लोगों ने बताया कि स्कूल के भूतल का दुकानदार पूरी तरह से इस्तेमाल करते हैं। जिसके लिए वे स्कूल की शिक्षिकाओं को किराया भी देते हैं।
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दो चाबियां, किराए से इंकार
सीएम योगी आदित्यनाथ
इस बात की पड़ताल स्कूल शिक्षिकाओं से की गई तो उन्होंने बताया कि स्कूल के भवन की दो चाबियां बनाई गई हैं। एक चाबी स्कूल स्टाफ के पास तो दूसरी दुकानदारों के पास रहती है। हालांकि किराया वसूलने की बात से प्रधानाध्यापक वसीम बानो और सहायक अध्यापिका सीमा गोस्वामी ने इंकार कर दिया। शिक्षिकाओं का दावा है कि दुकानदार स्कूल के बाहर अस्थायी दुकान लगाते हैं, तो रात में सामान अंदर रख लेते हैं। जिसके चलते एक चाबी उनको देनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि कई बार स्कूल आने में देरी हो जाती है तो स्कूल समय से खुला मिलता है। यहां सवाल यह है कि जब सरकारी स्कूलों के भवनों के निजी इस्तेमाल पर सरकार ने रोक लगा रखी है तो फिर क्यों स्कूल स्टाफ सरकार के आदेशों को हवा में उड़ा रहा है।
छात्राओं की सुरक्षा दुकानदारों के भरोसे
शिक्षिकाओं के अनुसार सुबह को स्कूल दुकानदार ही खोलते हैं। जबकि स्कूल में 30 से ज्यादा छात्राएं भी पढ़ती हैं। छात्राएं सुबह समय से ही स्कूल आ जाती हैं, तो उनकी सुरक्षा दुकानदारों के भरोसे ही छोड़ दी जाती है। शिक्षिकाएं खुद कह रही हैं कि उन्हें कई बार स्कूल आने में देर हो जाती है, तो ऐसे में कौन छात्राओं की सुरक्षा की गारंटी लेगा। विभागीय अफसरों को इसका संज्ञान लेने की जरूरत है।
तुरंत करेंगे कार्रवाई
बेसिक शिक्षा अधिकारी सतेंद्र कुमार ढाका का इस संबंध में कहना है कि शिक्षिकाओं की शह पर दुकानदारों को सामान रखने दिया जा रहा होगा। विभाग को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो मामले का संज्ञान लेकर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। स्कूल में छात्राएं भी पढ़ती हैं, उनकी सुरक्षा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है।
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