पुलिस से मिलीभगत कर बचता रहा था विनोद
मेरठ। साहिल होटल के संचालक विनोद अरोड़ा की शनिवार को हुई गिरफ्तारी को लेकर पुलिस मिलीभगत की चर्चा जोरों पर है। मुकदमा दर्ज होने के बाद भी लंबे समय वह खुलेआम घूमता रहा, जिसने पुलिस कह कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते रहे। अब जब सत्ता पक्ष के व्यापारी नेताओं का दबाव बढ़ा तो पुलिस के लिए उसे गिरफ्तार करना मजबूरी बन गया।
जुलाई, 2019 में एएचटीयू प्रभारी संजीव देशवाल ने सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया था। कुल 9 लोगों पर मुकदमा हुआ, जिसमें विनोद अरोड़ा भी शामिल रहा। लेकिन पुलिस के साथ अच्छी सेटिंग के जरिए वह गिरफ्तारी से बच गया। शेष सभी आठ लोगों को जेल भेज दिया गया। विनोद को बचाव के खूब मौके दिए गए। एक बड़े पुलिस अफसर से भी मुकदमे से नाम निकलवाने की पैरवी कराई, लेकिन यह संभव न हो सका।
इस बीच संजीव देशवाल सीओ सिविल लाइन बन गए और उनके नेतृत्व में एएचटीयू मुकदमे में वादी होने के चलते मामला तत्कालीन सीओ कैंट को ट्रांसफर कर दिया गया। कई बार विनोद अरोड़ा को सीओ कैंट दफ्तर के चक्कर लगाते भी देखा गया। शायद यही वजह थी कि मामला दबकर रह गया। लॉक डाउन के दौरान विनोद अरोड़ा नौचंदी पुलिस के साथ देखा गया। वह अपनी कार से अक्सर शाम को थानेदार के साथ देखा जाता था। यही नहीं क्षेत्र का एक चौकी इंचार्ज भी उसके होटल में रुकता था। अब जब उसकी गिरफ्तारी हुई तो व्यापारी दलों की गुटबाजी इसका आधार बनी। वह जिस व्यापारी गुट के साथ था, उस गुट का सत्ता पक्ष के व्यापारी नेताओं से छत्तीस का आंकड़ा है। मौका मिलते ही व्यापारी नेताओं ने पुलिस पर दबाव बनाया और गिरफ्तारी हो गई।