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Meerut News: मां-बेटी समेत तीन की मौत से गुस्साए ग्रामीण शव रखकर धरने पर बैठे

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दौराला। दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे-58 को पार करते समय वलीदपुर गांव की सविता, उषा व केला की सोमवार रात मौत से गुस्साए ग्रामीण मंगलवार को धरना देकर बैठ गए। पोस्टमार्टम के बाद दोपहर लगभग ढाई बजे ग्रामीणों ने तीनों के शव गांव के रास्ते पर रखकर धरना देकर मुआवजे, अंडरपास बनाने और एनएचएआई के अधिकारियों पर केस दर्ज करने की मांग की। सरधना विधायक अतुल प्रधान भी ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठ गए।
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सूचना पर पहुंची सरधना एसडीएम नारायणी भाटिया ने ग्रामीणों व परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने और एनएचएआई के अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग करने लगे। पूर्व विधायक संगीत सोम के आश्वासन के बाद शाम सात बजे साढ़े चार घंटे बाद धरना समाप्त हुआ।
हाईवे पर वलीदपुर गांव के सामने सोमवार देर रात मजदूरी कर घर लौट रहीं सविता, उनकी मां उषा, केला व गायत्री को किसी वाहन ने कुचल दिया था। भागने के दौरान चालक ने बाइक सवार यशवंत को भी टक्कर मार दी थी। अस्पताल में उपचार के दौरान सविता, उषा व केला ने दम तोड़ दिया था। मंगलवार दोपहर विधायक अतुल प्रधान के साथ ग्रामीणों ने तीनों के शवों को गांव के रास्ते पर रखकर धरना शुरू कर दिया।
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सूचना पर एसडीएम नारायणी भाटिया, सीओ दौराला प्रकाश चंद अग्रवाल व तीन थानों की फोर्स मौके पर पहुंच गई। एसडीएम ने ग्रामीणों से वार्ता की और तहसील स्तर से मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया, परंतु ग्रामीणों ने इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि पहले यह बताएं कि अब तक हिट एंड रन केस में तहसील स्तर से कितने मृतकों के परिवारों को मुआवजा मिला है। एसडीएम ने टोल अधिकारियों से फोन पर वार्ता की, लेकिन कोई अधिकारी गांव नहीं पहुंचा। विधायक अतुल प्रधान ने कहा कि गांव के सामने न तो अंडरपास की सुविधा है और न ही पथ प्रकाश की व्यवस्था व्यवस्था है।

शव पहुंचते ही ग्रामीणों की आंखें हुईं नम
मंगलवार दोपहर सविता, उषा व केला के शव वलीदपुर गांव पहुंचे। शव पहुंचते ही ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। मृतकों के परिवार में मातम पसरा हुआ था। पूरे गांव की गलियों में सन्नाटा छाया हुआ था। एक साथ तीन मौत होने के कारण गांव में चूल्हे तक नहीं जले। ग्रामीणों ने दुख के साथ गुस्सा भी भरा हुआ था। वह मौके पर पहुंचे अधिकारियों से लगातार अंडरपास बनाने की मांग की। उत्तर प्रदेश एससीएसटी आयोग के सदस्य नरेंद्र खजूरी ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वाली वलीदपुर गांव की मां-बेटी समेत तीनों के परिजन को शासन-प्रशासन की ओर से सात-सात लाख रुपये की मदद दिलाई जाएगी।

मुआवजा और नौकरी दिलाने के आश्वासन पर माने
दौराला। पूर्व विधायक संगीत सोम मंगलवार देर शाम धरने पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों व परिजनों से वार्ता की। उन्होंने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए परिवार को सांत्वना दी। आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री राहत कोष से पांच-पांच लाख रुपये, तहसील स्तर से सहायता राशि, डीएम स्तर से सहायता राशि, श्रम विभाग से सहायता राशि व मृतकों के जवान एक-एक बेटे को प्राइवेट नौकरी दिलाई जाएगी। उन्होंने अपनी ओर से बुधवार को परिवार की आर्थिक सहायता किए जाने की बात कही। इसके बाद परिजनों ने तीनों के शवों का अंतिम संस्कार कर दिया।

हाईवे पर नहीं थम रहे हादसे : अतुल प्रधान
दौराला। सरधना विधायक अतुल प्रधान ने कहा कि हाईवे पर लगातार हादसे हो रहे हैं। एनएच-58 हो या मेरठ-करनाल हाईवे हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इन मौतों का जिम्मेदार कौन है। सूचना के बाद भी टोल अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। जिम्मेदार, यदि अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा सकते तो अपने पदों से इस्तीफा दे दें। उन्होंने कहा कि हम विपक्ष में है, सिर्फ मांग ही कर सकते हैं, चिट्ठी लिख सकते है, लेकिन खुद को डबल इंजन की सरकार बताने वाले जवाब दें।
हाईवे पर ओवरलोड वाहन दौड़ रहे हैं, लेकिन अधिकारी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। उनकी मांग है कि इन गरीब परिवारों को मुआवजा दिया जाए। वह इस मुद्दे को सदन में भी उठाएंगे और डबल इंजन की सरकार से सवाल करेंगे। अतुल प्रधान ने पीड़ित परिवारों की 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद की। प्रधान राजेंद्र, कपिल रुहासा, बबलू दुल्हैड़ा, ऋषिपाल भंडारी, डॉ. कुलदीप आदि मौजूद रहे।

थोड़ा हंसा और बोलाकर, पता नहीं कब दुनिया को अलविदा कहना पड़ जाए...
शरद गुप्ता

दौराला। जिंदगी के 35 साल में तमाम उतार चढ़ाव आए, लेकिन केला व उषा ने एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। सोमवार देर रात दोनों ने अंतिम सांस भी एक साथ ली। दो दिन पहले ही केला ने उषा से कहा था कि थोड़ा हंसा और बोलाकर, पता नहीं कब दुनिया को अलविदा कहना पड़ जाए।
वलीदपुर गांव निवासी उषा और केला पड़ोसी थीं। केला उम्र में बड़ी थी और उसकी शादी भी पहले हुई थी। शादी के बाद जब उषा गांव में आई तो केला ने उषा को पड़ोसी नहीं बल्कि छोटी बहन की तरह प्यार किया। दोनों एक साथ एक ही जगह पर मजदूरी के लिए जाया करती थीं। एक समय ऐसा भी आया जब, उषा ने केला को सहारा दिया। केला के पति भूरा की लगभग चार-पांच साल पहले मौत हो गई। केला पति की मौत के बाद टूट गई, ऐसे में उषा ने उसे ने उसे ढांढस बंधाया और सहारा देते हुए इस दुख की घड़ी से उभरने में मदद की।
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