शामली/कैराना। विकासखंड कैराना व कांधला की 10 ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों में ग्राम सचिव द्वारा नियमों की अनदेखी की गई। ग्राम पंचायतों में बिना टेंडर व कुटेशन प्रक्रिया के ही करोड़ों रुपये के विकास कार्य कराए गए तथा एक फर्म को करीब चार करोड़ का भुगतान भी कर दिया। पंचायती राज विभाग ने मामले की जांच कराई तो गोलमाल सामने आया। जिसमें 21 ग्राम सचिवों की संलिप्तता की बात कहीं गई है। अब पंचायती राज उत्तर प्रदेश के निदेशक ने ग्राम सचिवों पर कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखा है। प्रशासन ने कार्रवाई की तैयारी कर ली है।
विकासखंड कैराना व कांधला की ग्राम पंचायतों में सन 2019, 2020, 2021, 2022 व 2023 में 204 कार्य कराए गए थे। उत्तर प्रदेश के पंचायती राज विभाग के निदेशक अटल कमार राय ने सहारनपुर मंडल के पंचायत उपनिदेशक से खंड विकास कैराना, कांधला में मैंसर्स ऊषा कंस्ट्रक्शन फर्म को किए गए करीब चार करोड़ रुपये के भुगतान की जांच कराई। जांच में पाया है कि 204 विकास कार्यों के सापेक्ष 105 विकास कार्य बिना टेंडर व कुटेशन प्रक्रिया के बिना ही कराए गए। साथ ही सक्षम स्तर से वित्तीय प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त की गई थी।
भुगतान की गई 48 लाख 54 हजार 345 रुपये की धनराशि के कागजात सचिवों द्वारा चोरी होना बताया गया एवं भुगतान की गई 42 लाख 48 हजार रुपये की धनराशि के कागजात सचिवों द्वारा उलपब्ध नहीं कराए गए। दोनों विकासखंडों में मैसर्स उषा कंस्ट्रक्शन नाम की एक ही कंपनी को चार करोड से अधिक का भुगतान किया गया था। निदेशक अटल कुमार राय ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर मामले में कार्रवाई करने को कहा है। अब डीएम, सीडीओ और अन्य अधिकारियों ने मामले में जल्द कार्रवाई करने की बात कहीं है।
इन गांवों में कराए विकास कार्य
टिटौली, ऐरटी, रामड़ा, मंडावर, अकबरपुर,भूरा, मुहम्मदपुर राई, ऊंचा गांव, नंगला राई, इस्सोपुर खुरगान आदि।
ग्राम पंचायत ऊंचा गांव में हुए सबसे अधिक कार्य
विकास खंड कैराना की ग्राम पंचायत ऊंचागांव में वर्ष 2019 और 2020 से लेकर 2020 और 2021 तक सबसे अधिक 27 कार्य कराए गए। इसके अलावा भूरा गांव में 26 कार्य कराए गए। किसी में भी कुटेशन और टेेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
ग्राम सचिवों में मची खलबली
मामला उजागर होने के बाद पूर्व में तैनात रहे ग्राम सचिवों में खलबली मची हुई है। माना जा रहा है कि जल्द ही अब ग्राम सचिवों पर गाज गिरेगी। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच भी स्थानीय प्रशासन ने शुरू करा दी है।
बिना अधिकारियों की जांच के कैसे कर दिया गोलमाल
इन ग्राम पंचायतों में गलत तरीके से हुए विकास कार्यों में अगर संलिप्तता की बात की जाए तो ग्राम पंचायत सचिव, विकासखंड अधिकारी, एडीओ पंचायत व डीपीआरओ की जानकारी के बिना यह कैसे संभव हो सकता है। मामले पर संज्ञान लेते हुए पंचायती राज उत्तर प्रदेश के निदेशक अटल कुमार राय ने जिलाधिकारी को पत्र लिख कर 15 दिन के अंदर आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई करने को कहा है।
कार्याें के प्रस्ताव व कार्य योजना बनाने के ये है नियम
अगर किसी भी ग्राम पंचायत में सड़क, नाला निर्माण या किसी भी धार्मिक स्थल के जीर्णाेद्धार के कार्य कराए जाते हैं तो सबसे पहले ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में ग्राम सभा की खुली बैठक आयोजित होती है। जिसमें ग्राम पंचायत सचिव होता हैं तथा बैठक में ग्राम पंचायत के कुल मतदाताओं की संख्या की 1/5 मौजूदगी होना जरूरी है। जिसके बाद पहली बैठक में प्रस्ताव बनाकर भेजना होता है तथा कार्य योजना बनाने के बाद प्राथमिकता के आधार पर कार्य कराए जाते हैं। साथ ही टेंडर और कुटेशन प्रक्रिया को भी अपनाया जाता है।
कांधला और कैराना ब्लॉक के कुछ गांवों में हुए विकास कार्यों में एक ही कंपनी को भुगतान करने, बिना टेंडर कराए ही कार्य कराने का मामला संज्ञान में आया है। शासन स्तर से पत्र मिला है। दोषी सचिवों पर कार्रवाई के आदेश सीडीओ को दिए गए हैं।
रविंद्र सिंह, डीएम शामली
बिना टेंडर प्रक्रिया के कैराना, कांधला क्षेत्र में विकास कार्य कराने संबंधी जांच रिपोर्ट मिली है। डीपीआरओ को सभी सचिवों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है। भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विनय कुमार तिवारी, सीडीओ
कुछ ग्राम पंचायतों में बिना टेंडर प्रक्रिया के कार्य कराए गए, जांच रिपोर्ट मिली है। अधिकारियों के निर्देशानुसार ही कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-संदीप अग्रवाल, डीपीआरओ , शामली