विक्टोरिया पार्क में बना स्तंभ
- फोटो : amar ujala
मेरठ विक्टोरिया पार्क अग्निकांड।
- फोटो : अमर उजाला
शौहर को खोने के बाद की दो बेटियों की परवरिश
वैली बाजार में रहने वाली फराह जाफरी ने शौहर अतहर को इस अग्निकांड में खोया था। फराह बताती हैं कि पति तीन दिन तक अस्पताल में जिंदगी के लिए लड़ाई लड़ते रहे। बाद में हार गए। उनकी मौत के बाद तमाम परेशानियां झेलते हुए उन्होंने दो बेटियों की परवरिश की।
पीड़ा झेली पर, हताश नहीं हुए
विक्टोरिया पार्क अग्निकांड आहत कल्याण समिति के महामंत्री संजय गुप्ता के परिवार के पांच सदस्य इस हादसे का शिकार हुए थे। संजय ने न सिर्फ पीड़ित परिवारों के लिए हक की लड़ाई लड़ी, बल्कि अपने परिवार के बाकी सदस्यों को भी संभाला। संजय गुप्ता ने बताया कि मुआवजे की लड़ाई अंतिम दौर में है। आने वाले तीन चार माह में निर्णय हो जाएगा।
यह भी पढ़ें: निकाय चुनाव 2023: मेरठ-बागपत में 11 मई को दूसरे चरण में होगा मतदान, 17 से 24 अप्रैल तक नामांकन दाखिल होंगे
मेरठ विक्टोरिया पार्क अग्निकांड।
- फोटो : amar ujala
लंबा संघर्ष किया
मनोरंजन पार्क निवासी नरेश तायल बताते हैं कि उनकी मां मालती तायल और पिता रमेश चंद्र तायल की जान इसी अग्निकांड में गई थी। मां का शव नहीं मिला। शव इस कदर जले हुए थे मां को पहचान नहीं पाए। उनका शव बदल गया था। प्रशासन ने तो नहीं माना, संघर्ष किया। बाद में कोर्ट ने माना कि उनकी मौत इसी अग्निकांड में हुई थी।
-6 अप्रैल 2006 : विक्टोरिया पार्क में कंज्यूमर मेले का उद्घाटन।
-10 अप्रैल 2006 : शाम को विक्टोरिया पार्क में अग्निकांड।
-65 लोग मारे गए।
-81 लोग गंभीर रूप से झुलसे।
-80 अन्य आग की चपेट में आए।
-6 साल बाद सुप्रीम कोर्ट में संजय गुप्ता की रिट हुई थी स्वीकार
-4 मई 2012 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा उपहार की तर्ज पर मुआवजा दे सरकार।
-9 मई 2012 को सरकार ने मुआवजे के लिए सुप्रीम कोर्ट से मांगी थी दो महीने की मोहलत।
-वर्ष 2016 सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा दिया।
-22 मार्च 2022: सुप्रीम कोर्ट में मुआवजे को लेकर लगातार सुनवाई के आदेश।