फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Meerut News: गंगा किनारे पर नजर आ रहे संस्कृति के विभिन्न रंग

विज्ञापन
गंगा किनारे कबड्डी खेलते स्रोत संवाद
विज्ञापन
श्रद्धालुओं का एक ही उद्देश्य मां गंगा की भक्ति और आशीर्वाद की कामना
विज्ञापन



रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर। महाभारत कालीन ऐतिहासिक नगरी में लगने वाले गंगा स्नान मेले का इतिहास महाभारत कालीन है। आस्था के इस संगम में पिछले करीब चार दिनों से अमीर-गरीब, शहरी और ग्रामीण अंचल से जुड़े लोग जाति-धर्म और ऊंच-नीच का भेदभाव छोड़कर तंबुओं की नगरी में निवास कर रहे हैं।
महाभारत के अनुसार हस्तिनापुर कुरुवंश की राजधानी थीं। आज पर्यटकों को यहां की ऐतिहासिकता और आध्यात्मिकता के साथ-साथ प्राकृतिक खूबसूरती भी खूब लुभाती है। गंगा स्नान की प्राचीन परंपरा महाभारत से जुड़ी है जो भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर शुरू हुई थी। कस्बे के प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर के अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया कि पुराणों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा का इतिहास महाभारत से जुड़ा है।
विज्ञापन

मान्यता है कि महाभारत के युद्ध में पांडवों द्वारा कौरव मारे गए थे। अपने परिवारजनों की मृत्यु के बाद पांडव बड़े व्याकुल हो उठे। पांडवों के व्याकुल मन को शांत करने के लिए भगवान कृष्ण ने कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा किनारे पांडवों से दीपदान कराया था। इसके बाद उनके व्याकुल मन को शांति मिली थी। इसके बाद से ही आज तक अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए दीपदान की परंपरा शुरू हुई।
उद्घाटन के तीसरे दिन कल-कल बहती गंगा के तट पर आस्था और उमंग का उल्लास है। साथ ही संस्कृति के विभिन्न रंग नजर आ रहे हैं। गंगा की रेती में लगने वाले कार्तिक पूर्णिमा मेले में पुरातन परंपराओं का प्रतिबिंब झलक रहा है। वहीं, आधुनिकता की बयार भी नजर आ रही है। यहां आए श्रद्धालुओं का मात्र एक ही उद्देश्य है भक्ति और मां गंगा का आशीर्वाद पाने की कामना। इसलिए गंगा किनारे सुबह से लेकर शाम तक ग्रामीण संस्कृति का समागम दिख रहा है। श्रद्धालुओं के तंबुओं में भी हवन के साथ मंत्रोच्चारण और भजन की गूंज है। यहां लगे बाजारों में रौनक है। गंगा के तट पर आस्था और मस्ती दिख रही है। बच्चे फास्ट-फूड के लिए जिद कर रहे हैं। वहीं, देशी पकवानों का आनंद भी जमकर लिया जा रहा है।
विज्ञापन


कार्तिक पूर्णिमा स्नान का विशेष महत्व
कार्तिक पूर्णिमा का दिन हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। इस दिन गंगा स्नान, व्रत, दान और दीपदान करने से मनुष्य को अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। कार्तिक पूर्णिमा को गंगा स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मा शुद्ध होकर मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर होती है। इस दिन भगवान विष्णु, भगवान शिव और माता लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष विधान है। गंगा के तट पर दीपदान करने से जीवन में प्रकाश, शांति और समृद्धि का संचार होता है। इसी कामना से लोग बड़ी संख्या में गंगा किनारे पहुंचते हैं।

गंगा किनारे कबड्डी खेलते स्रोत संवाद

गंगा किनारे कबड्डी खेलते स्रोत संवाद

गंगा किनारे कबड्डी खेलते स्रोत संवाद

गंगा किनारे कबड्डी खेलते स्रोत संवाद

गंगा किनारे कबड्डी खेलते स्रोत संवाद

गंगा किनारे कबड्डी खेलते स्रोत संवाद

गंगा किनारे कबड्डी खेलते स्रोत संवाद

गंगा किनारे कबड्डी खेलते स्रोत संवाद

गंगा किनारे कबड्डी खेलते स्रोत संवाद

गंगा किनारे कबड्डी खेलते स्रोत संवाद

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें