नगर निगम की बोर्ड बैठक में वंदेमातरम को लेकर उठा विवाद बढ़ता जा रहा है। दोनों ही पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। महापौर ने जहां राष्ट्र गीत के सम्मान के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ने का एलान कर दिया है तो विपक्षी पार्षदों ने स्पष्ट कह दिया है कि वे किसी भी कीमत पर वंदेमातरम बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। विपक्षी पार्षदों को निगम बोर्ड बैठक के मिनिटस का इंतजार है। इसके बाद मामला कोर्ट भी जा सकता है।
नगर निगम की बोर्ड बैठक में मंगलवार को विपक्षी पार्षदों द्वारा वंदेमातरम गायन का बहिष्कार करने को लेकर जमकर बखेड़ा हुआ था। महापौर ने वंदेमातरम का विरोध करने वाले पार्षदों की सदस्यता समाप्त करने और ऐसे सदस्यों को सदन में न बैठने देने का प्रस्ताव रखा, जिसे भाजपा के सभी सदस्यों ने पास कर दिया था। जिसके बाद विपक्षी पार्षदों ने सदन छोड़ दिया था। यह विवाद बुधवार को और गरमा गया।
हम नहीं हटेंगे निर्णय से पीछे
सदन में गूंजे वंदेमातरम के नारे
हम वंदेमातरम का अपमान नहीं सहेंगे। इसके लिए हम नगर निगम की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास कर चुके हैँ। हम अपने निर्णय से पीछे नहीं हटेंगे। इसके लिए भले ही क्यों न जेल जाना पड़े। उन्होंने कहा कि सपा को छोड़ अन्य सभी दलों के पार्षद वंदे मातरम को लेकर गंभीर हैं। अगली बोर्ड बैठक में केवल वही पार्षद सदन में बैठेगा, जो वंदेमातरम बोलेगा। -हरिकांत अहलूवालिया, महापौर
हमारा मजहब नहीं करता स्वीकार
वंदेमातरम को हमारा मजहब स्वीकार नहीं करता है। इसलिए हम सदस्यता से तो इस्तीफा दे सकते हैं। लेकिन वंदेमातरम नहीं गाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की जा रही है। हम न्यायालय जाएंगे। -अरशद उल्ला, पार्षद
जबरन नहीं थोप सकते
महापौर को अपने पद की गरिमा समझनी चाहिए। यह सभी धर्मों का देश है। हमारा भी देश की आजादी में बराबर का योगदान है। लेकिन कोई हमसे जबरन वंदेमातरम का गायन नहीं करा सकता। जिसे मजहब मंजूरी नहीं देता, उस काम को हम कैसे कर सकते हैं। न्यायालय का रास्ता हमारे लिए खुला है, हम जाएंगे। -दीवानजी शरीफ, पार्षद हमें शक की निगाह से न देखो
हमें शक की निगाह से तो मत देखो। हमारा मजहब कहता है कि मुल्क के लिए अपनी जान कुर्बान कर दो। देश की आजादी में हमारा भी बड़ा योगदान रहा है। वंदेमातरम का विरोध नहीं करते हैं। हम तो अन्य लोगों की भावनाओं को समझकर उठकर चले जाते हैं। इसलिए किसी को अधिकार नहीं कि हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचाए। -शाहिद अब्बासी, पार्षद
सपा नेताओं ने साधी चुप्पी
सदन में हंगामा
वंदेमातरम को लेकर सबसे ज्यादा विरोध सपा पार्षदों ने किया। लेकिन सपा नेताओं ने इस मामले में पूरी तरह से चुप्पी साध ली है। मंगलवार को हुए बखेड़े के बाद सपा के किसी स्थानीय या बड़े नेता ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया। इस संबंध में सपा पार्षद शाहिद अब्बासी पार्टी को बचाते नजर आए। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सपा से जुड़ा नहीं है। यह हमारे मजहब से जुड़ा है। लेकिन हमारे धर्म के सपा नेताओं ने भी उनकी कोई खबर नहीं ली।
यह संविधान का अपमान
युवा सेवा समिति की बैठक में अध्यक्ष बदर अली ने कहा कि सदन में वंदेमातरम को अनिवार्य करने का प्रस्ताव संविधान का अपमान है। संविधान ने सभी धर्मों के मानने वाले लोगों को अपनी आस्था के मुताबिक रहने की स्वतंत्रता प्रदान की है। यदि भाजपा पार्षद और महापौर समुदाय विशेष के पार्षदों पर अनावश्यक दबाव बनाते हैं तो इसका सड़क पर उतरकर विरोध किया जाएगा। बैठक का संचालन आमिर गाजी ने किया। इस दौरान बासित अली, अरशद सैफी, नईम सागर, इकबाल अब्बासी, हाजी नईम आदि मौजूद रहे।