जिले भर में वाहन चोरी के आंकडे़ चौंकाने वाले हैं। इससे अधिक चौंकाने वाला आंकड़ा वाहनों की बरामदगी का है। साढ़े पांच साल में जिले के लगभग 24 थाना क्षेत्रों से 11826 वाहन चोरी हुए हैं, लेकिन पुलिस की कामयाबी का आंकड़ा दस प्रतिशत को भी नहीं छू पाया। 10723 वाहन कहां गए, इसका जवाब पुलिस विभाग के पास नहीं हैं। सूचना के अधिकार के तहत पुलिस विभाग द्वारा दी गई यह जानकारी कहीं न कहीं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि मेरठ वाहन कटान का गढ़ बनता जा रहा है, जिस पर जिला पुलिस रोक लगाने में सफल नहीं हो पा रही है।
सूचना देने में भी अकड़
वाहन चोरी से संबंधित मामलों को लेकर मिशन कंपाउंड निवासी मनोज चौधरी ने पुलिस विभाग से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी। जानकारी के तहत 2010 से सूचना देने तक चोरी हुए वाहनों की संख्या और बरामदगी के आंकड़ों का ब्योरा मांगा गया था। वाहन बरामदगी करने में फिसड्डी रही पुलिस का आलम यह है कि परीक्षितगढ़ और दौराला थाने ने सूचना ही नहीं दी। दौराला थाने ने तो सूचना मांगने के औचित्य पर ही सवाल उठाए हैं। भावनपुर और सदर थाने ने अधूरी रिपोर्ट ही मुहैया कराई तो सिविल लाइन पुलिस बरामद वाहनों की संख्या भी नहीं बता सकी।
पुलिस का रिपोर्ट कार्ड
अधिकांश थानों ने मई 2016 से जून 2016 के बीच की जानकारी उपलब्ध कराई है। सूचना देने वाले थानों की कुल संख्या 24 है। इन थाना क्षेत्रों से वर्ष 2010 से सूचना देने की तिथि तक कुल 11826 वाहन चोरी हुए हैं। इनमें से पुलिस विभाग केवल 1103 वाहन ही बरामद कर सका है। पुलिस की सफलता का यह रिपोर्ट कार्ड 9.32 प्रतिशत पर ही सिमट गया है। उधर, थानोें में अधिकांश वाहन आज भी लावारिस के रूप में जमा हैं, लेकिन इन वाहनों की चोरी का कोई रिकार्ड संबंधित थाने में दर्ज नहीं है। ऐसे में वाहन बरामदगी की संख्या और भी कम हो सकती है। उधर एक बड़ा सवाल यह भी है कि वेस्ट यूपी में कई ऐसे मामले पकडे़ गए हैं, जिनमें अपराधियों ने चोरी के वाहनों का प्रयोग किया था। वारदात के बाद बदमाश इन चोरी हुए वाहनों को छोड़कर भाग जाते हैं। पुलिस बाद में इन वाहनों को भी बरामदगी के रिकॉर्ड में दर्ज कर अपनी पीठ थपथपा रही है।
वाहन कटान की ओर इशारा
साढे़ पांच साल के भीतर जिले के 24 थानों से चोरी हुए 10723 वाहन यदि सड़कों पर दौड़ रहे होते तो निश्चित रूप में पकड़ में आ गए होते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में आंकडे़ इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जिले में वाहन कटान का धंधा फल-फूल रहा है। चोरी हुए वाहन इन्हीं वाहन कमेलों में काटे जा चुके हैं।
थानों से चोरी और बरामद हुए वाहनों की संख्या
(नोट... आंकड़े जनवरी 2015 से जून 2016 तक के हैं)
थाना का नाम चोरी हुए वाहनों की संख्या बरामद वाहनों की संख्या
देहली गेट 310 45
लिसाड़ी गेट 432 14
मुंडाली 45 11
किठौर 138 19
सिविल लाइन 1621 बरामदगी की जानकारी नहीं
नौचंदी 1605 102
मेडिकल 2097 210
इंचौली 539 34
सरधना 226 93
सरूरपुर 53 12
जानी 34 19
हस्तिनापुर 53 18
मवाना 455 76
फलावदा 18 4
बहसूमा 47 4
कंकरखेड़ा 1009 98
ब्रह्मपुरी 726 48
टीपी नगर 693 170
परतापुर 319 23
लालकुर्ती 713 52
रेलवे रोड 284 31
कोतवाली 351 20
पल्लवपुरम (2015 में थाना बना) 41 00
रोहटा (2015 में थाना बना) 17 00