वातावरण में उड़ रही धूल सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। खासकर सांस और छाती के रोगियों के लिए यह बेहद खतरनाक है। इसमें सावधानी बरतने की जरूरत है।
वरिष्ठ सांस और छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि वातावरण में उड़ रही यह धूल दमा रोगियों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। दरअसल, धूल में बैक्टिरिया चिपके होते हैं, जो सांस के जरिए नाक, गले और सीने में इंफेक्शन कर सकते हैं। इससे निमोनिया और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। उन्होंने बताया कि इन्हेलर दो तरह के होते हैं, एक रोकथाम वाला होता है और दूसरा तुरंत रिलीफ देने वाला। अगर ज्यादा दिक्कत हो तो चिकित्सक की सलाह से तुरंत रिलीफ वाले इन्हेलर की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि वातावरण में धूल के फैलने से सांस के रोगियों की ओपीडी भी काफी बढ़ गई। कई मरीजों का ऑक्सीजन लेबल कम निकला। उन्होंने बताया कि सावधानी न बरतने पर सांस रोगियों के अलावा सामान्य लोगों को खांसी और धसका हो सकता है। वहीं जिला अस्पताल के नेत्र परीक्षण अधिकारी डॉ. पीके वार्ष्णेय ने बताया कि इस धूल से आंखों के रोगियों को आंख में खुजली की समस्या भी हो सकती है। लिहाजा घर से बाहर निकलें तो आंखों पर पानी की छीटें जरूर मारे। आखों को धोते रहें।
यह बरतें सावधानी
घर के खिड़की और दरवाजे बंद करके रखें
सांस के रोगी तरल पदार्थ ज्यादा लें
सांस रोगी दवाइयां और इन्हेलर लेते रहें
घर से बाहर निकलें तो नाक और मुंह पर कपड़ा या मास्क लगा लें
बाहर से आकर आंखों को साफ पानी से धोएं।