हिंदू धर्म में छुआछूत व ऊंच- नीच की बातों से तंग आकर करीब आधा दर्जन दलित परिवारों ने बौद्ध धर्म अपनाया। उनका कहना है कि हिंदू धर्म के लोग सिर्फ उनका इस्तेमाल करते हैं।
मामला उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का है। अमीनगर सराय में सिंघावली अहीर गांव के आधा दर्जन दलित परिवारों ने धर्म परिवर्तन करते हुए बौद्ध धर्म अपना लिया। बौद्ध संत प्रियंतीस भंते ने इन्हें दीक्षा दी। वहीं धर्म में शामिल करने के प्रमाणपत्र भी सौंपे। धर्म परिवर्तन करने वाले परिवारों का कहना है कि दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। इसी की वजह से यह कदम उठाया गया है।
रविवार को सिंघावली अहीर गांव में दलित समाज के आधा दर्जन परिवार ने धर्मपरिवर्तन करते हुए बौद्ध धर्म अपना लिया। धर्म परिवर्तन करने वाले मुन्ना लाल, बाबू, अजीत, अजय, मोनू, सोनू ने कहा कि समाज पर हर रोज अत्याचार हो रहे हैं। आज भी उन्हें छूआछूत की नजरों से देखा जाता है। कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं होती। ऊंची जाति के लोग उन्हें हीन भावना से देखते हैं। हर जगह केवल उनका इस्तेमाल किया जाता है। चाहे चुनाव हो या दंगा। अब वह इन घृणाभरी जिंदगी से ऊपर उठकर अपने समाज को नए मुकाम तक पहुंचाएंगे। अभी तक छह परिवार ने बौद्ध धर्म अपनाया है। पूजा पाठ से भी मोह भंग हो गया है। इसके लिए गांव में अपने सभी समाज के लोगों को इसके लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्हें बौद्ध धर्म की दीक्षा संत प्रियंतीस भंते ने दिलाई। उनकी ओर से बौद्ध धर्म में शामिल होने के प्रमाणपत्र भी वितरित किए गए।