जंबूद्वीप में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु।
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हस्तिनापुर। जम्बूद्वीप में दशलक्षण पर्व के अवसर पर दूसरे दिन गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता ससंघ के पावन सानिध्य में सोमवार को इंद्र ध्वज महामंडल विधान का शुभारंभ हुआ। सौधर्म इंद्र विजय कुमार जैन, रश्मि जैन द्वारा भगवान का पंचामृत अभिषेक संपन्न किया।
कार्यक्रम के मध्य में संघस्थ ब्रह्मचारिणी बहनों द्वारा सरस्वती पूजन एवं प्रज्ञा श्रमणी आर्यिका चंदनामती माता के द्वारा तत्वार्थ सूत्र के अध्याय का वाचन किया गया। उत्तम मार्दव धर्म की व्याख्या करते हुए गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता ने कहा कि उत्तम मार्दव जीवन में ऋजुता अर्थात सरलता को प्रदान करता है। उत्तम मार्दव का अर्थ है जीवन में मान कषाय को जन्म न देना। अनेक प्रकार के मान होते हैं। शास्त्रों में 8 प्रकार के मान बताये हैं। जिसके वशीभूत होकर प्राणी अपने नर जन्म को व्यर्थ कर देता है। उत्तम मार्दव हमें सिखलाता है कि जीवन में कभी भी किसी भी चीज का मान नहीं करना चाहिए। चूंकि जो आज है, वह कल नहीं रहने वाली है। कोई भी पद प्रतिष्ठा आपको आज प्राप्त है, कल वह आपको भूतपूर्व बना देगी एवं आपके नाम के साथ भूत शब्द जुड़ जायेगा। इसलिए मान कषाय का त्याग कर देना चाहिए। संस्थान के मंत्री विजय कुमार जैन ने बताया कि इंद्र ध्वज महामंडल विधान में लगभग 52 पूजाएं होती है संघस्थ प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माता द्वारा प्रतिदिन तत्वार्थ सूत्र की अर्थ सहित व्याख्या की जाती है, जिसे जूम एप के माध्यम से सैकड़ों भक्त देखते हैं। संस्थान के पीठाधीश स्वस्ति रवींद्र कीर्ति स्वामी के नेतृत्व में कार्यक्रम किया जा रहा है।