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सेना का अधिकारी बनकर होटल में करता था डील

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सेना का अधिकारी बनकर होटल में करता था डील
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मेरठ। सेना का जवान नरेश कुमार बेहद शातिर है। वह सेना का अधिकारी बताकर अभ्यर्थियों से मिलता था और पांच लाख रुपये में भर्ती कराने का ठेका लेता था। उसने 10 से ज्यादा अभ्यर्थियों से भर्ती के लिए पांच-पांच लाख रुपये लिए थे। एसटीएफ की टीम अब उसके कारनामों की पड़ताल में जुट गई है। अग्निवीर भर्ती की शुरूआत होते ही नरेश और उसके भाइयों ने मुजफ्फरनगर में डेरा डाल लिया था।
नरेश कुमार वर्ष 2009 में सेना में भर्ती हुआ था। 13 साल में अलग-अलग जगहों पर उसे तैनाती मिलती रही। अग्निवीर भर्ती शुरू होते ही नरेश के दोनों भाई सौरभ और तनुज ने मुजफ्फरनगर में डेरा डाल दिया था। दोनों भाई नरेश को सेना का बड़ा अधिकारी बताकर अभ्यर्थियों के साथ होटल में मीटिंग कराते थे। यहां चयन कराने के नाम पर डील होती थी। पूछताछ में पता चला कि नरेश कंधों पर दो-तीन स्टार लगाकर आता था और सेना के अधिकारियों जैसी बात करके पूरी भूमिका बनाकर जाल में फंसाता था।
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वीआईपी अंदाज और ठगी का जाल
नरेश कुमार का ड्यूटी पर कम और भर्ती पर ज्यादा फोकस रहता था। वह हमेशा लग्जरी गाड़ी में चलता था। लंबे समय नौकरी होने के चलते सेना की सारी प्रक्रिया जानता था। इसके चलते वह अभ्यर्थियों को आसानी से फंसा लेता था। अभ्यर्थियों के परिवार को पूरा भरोसा देता था कि भर्ती में नंबर आ जाएगा। वह खुुद को भर्ती बोर्ड के लोगों से जुड़ा बताता था।
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-- वर्जन --
एएसपी एसटीएफ बृजेश सिंह के नरेश और उसके साथी यह सोचकर डील करते थे कि यदि भर्ती में नंबर आ गया तो उनकी डील पक्की होने के साथ ही उन पर भरोसा बढ़ जाएगा और यदि नहीं आया तो वह अभ्यर्थी के नंबर मोबाइल नंबर ब्लैकलिस्ट में डाल देते थे। अब नरेश के बाकी साथियों की तलाश की जा रही है। उनके गिरफ्त में आने के बाद ही और राज खुल सकेंगे।
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