मोदीपुरम। मोदीपुरम पुल से पीएसी नाले तक बनने वाले नाले के निर्माण कार्य के दौरान शुक्रवार को हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। नगर निगम की टीम जैसे ही खुदाई शुरू करने पहुंची, सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह ने विरोध जताते हुए काम रुकवा दिया। करीब एक घंटे तक चली बहसबाजी के बाद स्थानीय लोगों और निगम अधिकारियों के समझाने पर स्थिति शांत हुई और खुदाई पुनः शुरू हो सकी।
रुड़की रोड पर डोरली गेट से पीएसी नाले तक मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) नाला निर्माण कार्य कर रहा है। वहीं सड़क की दूसरी ओर मोदीपुरम फ्लाईओवर से छठी वाहिनी पीएसी नाले तक नाला निर्माण नगर निगम की जिम्मेदारी है। बरसात में इस मार्ग पर लगातार जलभराव की समस्या रहती है। दुकानों के सामने पानी भरने से लोगों और व्यापारियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। इसी समस्या के समाधान को लेकर शुक्रवार को नगर निगम के जेई सचिन कुमार और पार्षद नरेश सैनी मोदीपुरम पुल के पास पहुंचे और टूटे नाले की स्लैब हटाकर खुदाई शुरू करवाई।
इसी दौरान समीप स्थित अपनी बिल्डिंग के सामने खुदाई होते देख पूर्व जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि उनकी बिल्डिंग के सामने नाला ठीक है और वहां जलभराव भी नहीं होता, इसलिए निर्माण कहीं और से शुरू किया जाए। विरोध के बाद कर्मचारियों ने काम रोक दिया। स्थिति स्पष्ट करने के लिए जेई ने स्लैब हटवाकर नाले की जांच करवाई तो पता चला कि नाले की दोनों दीवारें और फर्श ईंटों का बना है, जो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। नाले में मलबा भी भरा हुआ था। करीब एक घंटे की बातचीत, और स्थानीय लोगों की सहमति के बाद आखिरकार नाले की खुदाई का कार्य शुरू किया गया।
इनका कहना है…
“कुछ महीने पहले ही नाले का निर्माण कराया था, वह ठीक है। हमने निर्माण कार्य का विरोध नहीं किया। स्थानीय लोग आए थे, सभी की सहमति से काम शुरू हुआ।”
राजपाल सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष, सपा
“नाले का निर्माण 15–17 साल से नहीं हुआ। दीवारें और फर्श पूरी तरह टूटी हैं। जलभराव रोकने के लिए 2.63 करोड़ रुपये की लागत से 1200 मीटर लंबा और चार फीट चौड़ा आरसीसी नाला बनाया जा रहा है।”
सचिन कुमार, जेई, नगर निगम