मेरठ। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव युद्धवीर सिंह सहित एसोसिएशन के चार पदाधिकारियों के खिलाफ थाना कोतवाली चंदौली में धोखाधड़ी व आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया। वादी स्वयं प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय रमेश यादव हैं, जिसको लेकर यूपीसीए पदाधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस मामले में कोर्ट में पेश न होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चंदौली ने यूपीसीए सचिव सहित चारों पदाधिकारियों को समन जारी किए हैं। जिसमें 9 सितंबर को कोर्ट में पेश होने को कहा गया है।
कूूच विहार ट्रॉफी 2018-19 में यूपी टीम में प्रयागराज जिले के सैदाबाद क्षेत्र के ग्राम अंजना निवासी रमेश कुमार यादव के बेटे त्रिवेश यादव भी शामिल थे। कूच विहार ट्रॉफी पर यूपी ने कब्जा किया था। त्रिवेश यादव के पिता न्यायिक अधिकारी रमेश कुमार यादव ने चंदौली कोतवाली ने यूपीसीए पदाधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें यूपीसीए सचिव डॉ. युद्धवीर सिंह, मुख्य कार्यकारिणी अधिकारी दीपक शर्मा, यूपी अंडर-19 के मैनेजर सतीश जायसवाल एवं कोच मौ. आमिर को आरोपी बनाया गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि कूच विहार ट्रॉफी के पांच मैचों में क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल व फाइनल मैच में 15 सदस्यता वाली टीम में जगह नहीं दी गई। जबकि अधिक उम्र वाले खिलाड़ियों को टीम में वरीयता दी गई। बोर्ड द्वारा दी जाने वाली राशि 80 हजार रुपये भी यूपीसीए पदाधिकारियों ने नहीं दिए। इसके अलावा भी कई संगीन आरोप यूपीसीए पदाधिकारियों पर लगाए गए हैं। अब समन जारी होने के बाद यूपीसीए पदाधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 9 सितंबर को सभी आरोपी पदाधिकारियों को चंदौली कोर्ट में पेश होना है।
हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
इस संबंध में मेरठ निवासी यूपीसीए सचिव डॉ. युद्घवीर सिंह ने मंगलवार को कहा कि पद संभालने के बाद पूरी जिम्मेदारी के साथ क्रिकेट को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। यूपी के खिलाड़ियों में प्रतिभा खोजकर उन्हें एक दिशा देने का कार्य यूपीसीए कर रही है। जिस कूच विहार ट्रॉफी को लेकर मुझ पर आरोप लगे, वो यूपी टीम ने जीती, जिसमें दो खिलाड़ी एशिया कप खेले। अंडर-19 त्रिकोणीय शृंखला इंग्लैंड में जीतकर लाए। चंदौली के न्यायिक अधिकारी रमेश कुमार यादव ने मुकदमा कराया है, वो उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। कोई भी मुकदमा दर्ज कराने या कोई भी आरोप लगाने के लिए स्वतंत्र है। लेकिन मामला कानूनी लड़ाई का है तो जवाब भी कानूनी तौर पर ही दिया जाएगा। हमने इस मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बाकी कानून का किसी प्रकार से उल्लंघन नहीं किया जाएगा। हम कोर्ट का पूरा सम्मान करते हैं।