वहीं, तेज बारिश में भी कटान को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। जेसीबी मशीन से कच्ची तटबंध की साइड में मिट्टी लगाकर मजबूत करने का काम किया जा रहा है। इस मामले में खादर क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि अगर गंगा का थोड़ा सा भी जलस्तर बढ़ता है तो कच्चा तत्व टूटकर खादर क्षेत्र में तबाही मचा सकता है। इसलिए इस कटान को रोकने के लिए समय से पुख्ता प्रबंध करने होंगे।
सैकड़ों की संख्या में मंगलवार की सुबह ग्रामीण तटबंध पर पहुंचे। उसके बाद मामले की सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को दी। वहीं, अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। क्षेत्र में बाढ़ चौकियों को अलर्ट किया गया है। एसडीएम अखिलेश यादव गंगा के जलस्तर पर पूरी तरह निगाहें बनाए हुए हैं और पल-पल की अपडेट वार्ड चौकियों पर तैनात लेखपालों से लिया जा रहा है। वहीं, सिंचाई विभाग के अधिकारी भी तटबंध पर तैनात किए गए हैं।
बताया गया कि मंगलवार दोपहर एक बजे हरिद्वार से एक लाख 77 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जो खादर क्षेत्र में पहुंचकर हालातों को और नाजुक बना सकता है।
लगातार घट बढ़ रहा है जलस्तर
मंगलवार प्रातः चार बजे गंगा का जलस्तर 1 लाख 29 हजार क्यूसेक पर पहुंच गया। उसके बाद 10 बजे एक लाख रह गया। लोगों ने राहत की सांस ली लेकिन, दोपहर एक बजे फिर एक लाख 30 हजार क्यूसेक पर पहुंच गया। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश से पानी में वृद्धि होने की संभावना है।
तहसील विभाग और शिक्षा विभाग अलर्ट पर
लगातार बारिश के कारण बढ़ रहे गंगा के जलस्तर को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने सिंचाई विभाग और तहसील विभाग को अलर्ट पर रखा है, जो हर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। उधर, लगातार बढ़ रहे जलस्तर से खादर क्षेत्र में कच्चे तटबंध के हालात नाजुक बने हुए हैं। कई स्थानों पर काटन चल रहा है, जिसे रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर जलस्तर और बढ़ जाता है तो तटबंध पर खतरा और बढ़ जाएगा।
बिजनौर का हाल
प्रशासन ने गांवों में मुनादी कराई है। ग्रामीणों को बताया गया कि गंगा में दो लाख क्यूसेक पानी और छोड़ा जाएगा। किसी भी समय बाढ़ की स्थिति बन सकती है। ऐसे में गंगा के तटवर्ती गांवों को अलर्ट में किया गया।
बताया गया कि गंगा खतरे के निशान के पास बह रही है। वहीं, मंडावली और भागूवाला क्षेत्र में फोरलेन मार्ग पर जलभराव हुआ है, जिससे आवागमन प्रभावित हो रहा है। भागूवाला में बिजली घर, पशु चिकित्सालय और प्राचीन मां काली मंदिर भी जलमग्न हो गया है।
वहीं, कोटावाली नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी रापटे पर वाहनों का आवागमन सुबह नौ बजे से बंद कर दिया गया। वहीं, दोनों ओर पुलिस बल तैनात किया गया है।