सीओ सिविल लाइन श्रीराम अर्ज, सीओ ब्रहमपुरी अखिलेश भदौरिया, सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला, सीओए एलआईयू कई थानों की पुलिस और मजिस्ट्रेट के साथ पहुंचकर महापंचायत का नेतृत्व कर रहे सुशील गौतम समेत पांच लोगों को हिरासत में लेकर थाने भेज दिया। जबकि भीड़ पर लाठीचार्ज कर खदेड़ दिया। उसके बाद अलग अलग गांवों से आ रहे लोगों को जहां भी पुलिस के हत्थे चढ़े उन्हें वहीं दौड़ा दिया गया।
यह पंचायत गंगानगर क्षेत्र के उल्देपुर गांव निवासी रोहित की हत्या के बाद की गई थी। शिवरात्रि पर कावड़ यात्रा के दौरान 9 अगस्त की सुबह रोहित की हत्या कर दी गई थी जिसमें स्वर्ण जाति के 9 लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। युवक के पिता देवेंद्र सिंह का आरोप है की पुलिस ने रात से ही उन्हें और उनके परिवार को उठाने की साजिश की थी।
उन्होंने जो परमिशन पंचायत के लिए ली थी वह भी पुलिस अफसरों ने फाड़ कर फेंक दी। युवक के पिता का आरोप है कि उनकी मांग है कि उनके खिलाफ दर्ज किया गया मुकदमा वापस हो। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी हो, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी व आर्थिक सहायता को जो आश्वासन अफसरों ने दिया वह पूरा नहीं किया गया।
गंगानगर क्षेत्र के उल्देपुर गांव में नौ अगस्त को दो पक्षों में खूनी संघर्ष हो गया था। इसमें रोहित जाटव की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। नौ में से चार आरोपी जेल जा चुके हैं। पुलिस ने रोहित पक्ष पर भी क्रॉस मुकदमा दर्ज कर लिया था। इसे लेकर दलित आंदोलन कर रहे हैं। 20 अगस्त की महापंचायत में पुलिस अफसरों ने क्रॉस केस समाप्त करने सहित कई मांगों को पूरा करने का भरोसा दिया था। लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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