यूपी एटीएस के हत्थे चढ़े आतंकी फंडिंग नेटवर्क के तार मुजफ्फरनगर जिले में भी तलाशे जा रहे हैं। आतंक के सौदागरों को जिले से भी मदद मिलती रही है। आतंकी फंडिंग और आतंकियों को पनाह के मामले में जिला बदनाम है। इसको लेकर स्थानीय खुफिया तंत्र और पुलिस महकमा हरकत में आ गया है। साथ ही जिला एनआईए के साथ एटीएस के रडार पर है।
चरथावल के गांव कुटेसरा में 6 अगस्त 2017 को एटीएस ने दबिश देकर अंसारुल बांग्ला आतंकी संगठन के सक्रिय सदस्य अब्दुल्ला अलमामून को पकड़ा था। अब्दुल्ला की गिरफ्तारी ने कई रहस्यों से पर्दा हटाया था। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और बिजनौर तक तफ्तीश की गई थी। एक बार फिर से जिला एटीएस के रडार पर है। लश्कर-ए-तैयबा को आतंकी फंडिंग के मामले में यहां भी जांच-पड़ताल हो सकती है। क्योंकि जिले में इसी आतंकी संगठन को हवाला कारोबार के जरिये मदद मिलती रही है।
लश्कर-ए-तैयबा को आतंकी फंडिंग को लेकर सराफ अंकित गर्ग, आदिश जैन को एनआईए दबोच चुकी है। एनआईए ने लगातार यहां दबिश देकर आतंकी फंडिंग नेटवर्क के सुराग ढूंढे हैं। एटीएस जिले में कभी भी छापेमारी कर सकती है। स्थानीय खुफिया तंत्र भी मामले में सक्रिय हो गया है। पकड़े गए युवकों का बड़ा नेटवर्क यूपी के कई जिलों के साथ बाहर भी काम कर रहा था। इसकी तस्दीक की जा रही है कि जिले में भी संदिग्ध गतिविधियों के मद्देनजर कोई व्यक्ति इनके संपर्क में तो नहीं रहा है। इसको लेकर एटीएस और एनआईए जांच कर सकती है, जिससे व्यापारियों, खाड़ी देशों में काम करने वाले युवकों, उनके परिजनों के साथ स्वर्ण व्यापारियों में हड़कंप की स्थिति है।
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