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UP: पुलिस के लिए चुनौती बनी ये पांच बड़ी वारदातें, बदमाशों के अपराध करने का तरीका अलग

Thu, 17 May 2018 07:03 PM IST
यूपी अमर उजाला ब्यूरो, गजेंद्र चौहान, मेरठ
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आरोपियों का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के इस शहर में पांच बड़ी वारदातों का खुलासा हुआ तो कई ऐसे चेहरे सामने आये, जिन्हें पकड़ना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। इन सभी बदमाशों का अपराध करने का तरीका भी अलग था।  

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पेशेवर बदमाशों से ज्यादा बाहरी बदमाशों से निपटना मेरठ पुलिस के लिए चुनौती बना है। पुलिस अफसरों की इन्वेस्टीगेशन में ऐसे कई तथ्य सामने आए हैं। यही वजह रही कि ऐसी अधिकांश संगीन वारदातों का खुलासा देर से हुआ तो कई ऐसे नए चेहरे बेनकाब हुए जिनकी जिले के 32 थानों में क्राइम हिस्ट्री ही नहीं मिली। ऐसी वारदातों ने जिले का क्राइम रेट भी बढ़ा दिया। यह मुद्दा इंटरस्टेट बॉर्डर मीटिंग के साथ ही जिले की क्राइम मीटिंग में प्रमुखता से उठता है। 

अपराध करने का तरीका अलग
अधिकांश वारदातों के खुलासे में सामने आया है कि ऐसे बदमाशों का अपराध करने का तरीका भी अलग है। रैकी कर अक्सर दूसरे शहरों में वारदात करने के बाद अपना शहर भी छोड़कर दूर चले जाते हैं। वहीं, कुछ बदमाश अपने साथियों और रिश्तेदारों से लंबे समय तक संपर्क नहीं करते। कई ऐसे अपराधी हैं, जो वारदात करने के बाद से फरार हैं। उनका पता लगाना ही पुलिस के सामने चुनौती बना है। 
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किठौर में डकैतों का कहर
12 अप्रैल 2018: किठौर में शकील के घर में बदमाशों ने रैकी करने के बाद डकैती की वारदात की। शकील की पत्नी रेशमा की हत्या कर दी। पुलिस ने वारदात में शामिल बावरिया गैंग के फैजान, नाहिद व राजिक निवासी फिरोजपुर संभल को गिरफ्तार किया। इन तीनों अपराधियों का मेरठ में कोई क्राइम रिकॉर्ड दर्ज नहीं मिला। केवल गैंग लीडर चंदू का रिकॉर्ड संभल, मुरादाबाद में सामने आया। इस केस का काफी दिनों बाद खुलासा हुआ। चंदू अभी तक फरार है।

हाइवे पर दुल्हन की हत्या
27 अप्रैल:
हाइवे-58 गाजियाबाद से मुजफ्फरनगर दुल्हन लेकर लौट रही बारात पर बदमाशों ने रैकी के बाद हमला बोला था। दुल्हन की हत्या कर बदमाश ज्वैलरी, कैश और दुल्हन की सजी कार लूटकर ले गए थे। मामला शासन तक गूंजा तो एसटीएफ को लगाया गया। एसटीएफ ने तीन आरोपियों अक्षय, विपिन और धीरज निवासी गाजियाबाद को गिरफ्तार किया। तीनों आरोपियों का मेरठ में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। सरगना अंकित राठी और नरसी का अभी तक सुराग नहीं लगा है।

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शराब कंपनी का कैश लूटा

फाइल फोटो
06 जनवरी: सिविल लाइन क्षेत्र के मोहनपुरी में चड्ढा ग्रुप की शराब कंपनी के कर्मचारियों से 18 लाख रुपये की लूट हुई थी। जिसमें प्रीतम, संदीप निवासी यादगारपुर सिविल लाइन और निखिल, राहुल निवासी कानपुर को गिरफ्तार किया गया था। इन चारों आरोपियों का कोई पुराना रिकॉर्ड नहीं है। शराब की दुकानों से रोजाना वसूली करने आने वाले कर्मचारियों की ये बदमाश रैकी करते थे। चारों ही नए चेहरे थे।

शास्त्रीनगर लूटकांड
17 नवंबर 2017:
क्राइम ब्रांच ने रोहित उर्फ दीपांशु व अर्जन उर्फ शम्मी निवासी कानपुर को मुठभेड़ के बाद पकड़ा था। ये आरोपी लूट करने के बाद शहर छोड़ देते थे। इनको पकड़ना चुनौती बना हुआ था। इन दोनों बदमाशों का भी आपराधिक रिकॉर्ड जिले में नहीं मिला था।

डॉक्टर को अगवा कर फिरौती मांगी
19 जून 2017:
मेरठ के बदमाशों ने दिल्ली के डॉक्टर श्रीकांत का अपहरण कर पांच करोड़ की फिरौती मांगी। बदमाशों में सुशील व उसका भाई अनुज था। पुलिस ने उनके साथियों को गिरफ्तार करके डॉक्टर को बंधनमुक्त कराया। पुलिस के अनुसार इन दोनों भाइयों पर कोई पुराना मुकदमा नहीं मिला। सुशील एक कंपनी की टैक्सी चलाता था।

इनसे निपटना चुनौती
लगभग हर बड़ी वारदात में नए बदमाशों के चेहरे सामने आ रहे हैं, जिन्हें पकड़ना चुनौती बन जाता है। कितने ही शातिर क्यों न हो। लेकिन थोड़ा देर से सही, पुलिस के हत्थे चढ़ जाते हैं। गिरफ्तारी के बाद ऐसे बदमाशों का रिकॉर्ड जिला पुलिस सुरक्षित कर लेती है। -राजेश कुमार पांडेय, एसएसपी

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