06 जनवरी: सिविल लाइन क्षेत्र के मोहनपुरी में चड्ढा ग्रुप की शराब कंपनी के कर्मचारियों से 18 लाख रुपये की लूट हुई थी। जिसमें प्रीतम, संदीप निवासी यादगारपुर सिविल लाइन और निखिल, राहुल निवासी कानपुर को गिरफ्तार किया गया था। इन चारों आरोपियों का कोई पुराना रिकॉर्ड नहीं है। शराब की दुकानों से रोजाना वसूली करने आने वाले कर्मचारियों की ये बदमाश रैकी करते थे। चारों ही नए चेहरे थे।
शास्त्रीनगर लूटकांड
17 नवंबर 2017: क्राइम ब्रांच ने रोहित उर्फ दीपांशु व अर्जन उर्फ शम्मी निवासी कानपुर को मुठभेड़ के बाद पकड़ा था। ये आरोपी लूट करने के बाद शहर छोड़ देते थे। इनको पकड़ना चुनौती बना हुआ था। इन दोनों बदमाशों का भी आपराधिक रिकॉर्ड जिले में नहीं मिला था।
डॉक्टर को अगवा कर फिरौती मांगी
19 जून 2017: मेरठ के बदमाशों ने दिल्ली के डॉक्टर श्रीकांत का अपहरण कर पांच करोड़ की फिरौती मांगी। बदमाशों में सुशील व उसका भाई अनुज था। पुलिस ने उनके साथियों को गिरफ्तार करके डॉक्टर को बंधनमुक्त कराया। पुलिस के अनुसार इन दोनों भाइयों पर कोई पुराना मुकदमा नहीं मिला। सुशील एक कंपनी की टैक्सी चलाता था।
इनसे निपटना चुनौती
लगभग हर बड़ी वारदात में नए बदमाशों के चेहरे सामने आ रहे हैं, जिन्हें पकड़ना चुनौती बन जाता है। कितने ही शातिर क्यों न हो। लेकिन थोड़ा देर से सही, पुलिस के हत्थे चढ़ जाते हैं। गिरफ्तारी के बाद ऐसे बदमाशों का रिकॉर्ड जिला पुलिस सुरक्षित कर लेती है।
-राजेश कुमार पांडेय, एसएसपी
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