भारत सरकार करे कम फीस में पढ़ाई की व्यवस्था
चिलकाना निवासी यूक्रेन में एमबीबीएस दूसरे वर्ष के छात्र अजीम अंसारी का कहना है कि यदि भारत सरकार यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों की भारत के ही प्राइवेट कॉलेजों में कम फीस में पढ़ाई की व्यवस्था करा दे, तो वहां पढ़ रहे छात्रों का भविष्य सुधर सकता है। भारत सरकार को छात्रों की ऑनलाइन डिग्री को स्वीकार करके भारत में ही प्रैक्टिकल की सुविधा देनी चाहिए। इसके लिए भले ही एक वर्ष की जगह दो वर्ष की इंटर्नशिप कर दी जाए। अजीम ने बताया कि यूनिवर्सिटी उन्हें बुलाना चाहती है, लेकिन यूक्रेन सरकार सुरक्षा की दृष्टि से कोई जिम्मेदारी नहीं ले रही। ऐसे में उनका पढ़ाई का नुकसान हो रहा है।
सरकार से थी बहुत सारी उम्मीदें
गंगोह निवासी एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र जैद का कहना है कि उन्हें केंद्र सरकार से बहुत सारी उम्मीदें थी, लेकिन कोर्ट में दायर हलफनामे के बाद उन्हें अपना भविष्य अधर में लटकता दिख रहा है। उनका एक वर्ष खराब हो चुका है। सरकार देश के अंदर तो मेडिकल छात्रों को सभी तरह की सुविधाएं दे रही है, लेकिन उन्हें विदेश में पढ़ने जाने की सजा दी जा रही है। उन्होंने सरकार से दरखास्त की है कि जल्द से जल्द उनके लिए भी कोई रास्ता निकाला जाए।
सरकार के रवैये से उम्मीदों पर फिरा पानी
यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही साढ़ौली हरिया निवासी काजल चौधरी का कहना है कि उनके पिता ने मकान पर कर्ज लेकर उसे विदेश पढ़ने भेजा था। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने के बाद उसे लौटना पड़ा। अब उसकी पढ़ाई अधर में लटकी है। सरकार को चाहिए कि वह यूक्रेन से लौटे छात्रों की पढ़ाई को देश के मेडिकल कॉलेजों में पूरा कराए। ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
यूक्रेन से लौटे विद्यार्थियों को देश के कॉलेजों में दाखिला नहीं दिए जाने के फैसले पर मुजफ्फरनगर जिले के छात्र-छात्राओं आपत्ति जताई है। विद्यार्थियों का कहना है कि सरकार का यह तर्क सरासर गलत है। भले ही वह लोग विदेश में पढ़ाई कर रहे हो, लेकिन वह भारतीय ही तो हैं। इसलिए सरकार को उनके बारे में विचार करना चाहिए।
अंधकारमय दिख रहा भविष्य
यूक्रेन की इवानो यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों को भारत में प्रवेश न देने के फैसले से आहत रतनपुरी क्षेत्र के गांव बड़सू निवासी छात्र विकास कुमार का कहना है कि यूक्रेन में पढ़ाई करने वाले दूसरे देशों ने छात्रों को अपने यहां के कॉलेजों में प्रवेश देने की घोषणा की है, लेकिन भारत जैसे संपन्न देश ने मना कर दिया। उनके अब तक 25 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। उनकी यूनिवर्सिटी ने किसी अन्य देश में अपनी ब्रांच खोलने से मना कर दिया। अब उन्हें अपना भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। सरकार को छात्र हित में कोई ठोस कदम उठाना चाहिए।
यूनिवर्सिटी पहुंचकर ही करूंगा आगे की पढ़ाई
शाहपुर गांव बसीकलां निवासी अबुजर ने बताया कि वह यूक्रेन की उजारोहद यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पांचवें वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। उसकी उजारोहद यूनिवर्सिटी में ऑफलाइन पढ़ाई शुरू हो गई है। वह सितंबर माह के अंत में पढ़ाई पूरी करने के लिए यूक्रेन जाएगा, लेकिन यूक्रेन की राजधानी कीव में एयरपोर्ट बंद होने के कारण यूक्रेन के पास स्थित देश मालडोवा पहुंचकर वहां से बस द्वारा अपनी यूनिवर्सिटी पहुंचेगा। मालडोवा जाने के लिए वह अपना वीजा बनवाने की तैयारी कर रहा है।
भारतीय छात्रों के प्रति सरकार को होना चाहिए गंभीर
मोरना चीनी मिल निवासी विश्वास उर्फ विशु यूक्रेन की इवानो स्थित यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। यह उसका अंतिम वर्ष है। विशु का कहना है कि यूक्रेन को हेंग्री, पोलैंड, रोमानिया आदि कंट्री की यूनिवर्सिटी से बात कर शेष पढ़ाई व पेपर वहां से पूर्ण कराए जाएं। यूक्रेन से लौटे छात्रों के लिए सरकार को भी गंभीर होना चाहिए।
देश में नहीं मिलती शिक्षा, विदेश पढ़ने को मजबूर बच्चे
पुरकाजी के गांव रेता नगला निवासी छात्र विशाल कुलवारिया यूक्रेन के बेनिप्रो सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। उसने ऑनलाइन पढ़ाई कर द्वितीय वर्ष की परीक्षा पास कर ली है। तीसरे वर्ष की पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है। कहा कि भारत में एजुकेशन नहीं मिलती है। भारत में छात्रों की संख्या इतनी है कि सरकार उनके बारे में ही नहीं सोच पा रही है।
सरकार को विदेशों की यूनिवर्सिटी से करनी चाहिए बात
जानसठ निवासी छात्र शाहफेज पुत्र शाहिद यूक्रेन में ओलडावा स्थित यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। फिलहाल वह ऑनलाइन पढ़ रहा है। भारत में दाखिला नहीं मिलने से ऑनलाइन पढ़ाई में भी दिक्कत आएगी। कहा कि इससे भविष्य खराब भी हो सकता है। सरकार को अन्य कंट्री की यूनिवर्सिटी से बात कर शेष पढ़ाई व पेपर वहां से पूर्ण कराने चाहिए। सरकार को छात्रों के भविष्य के बारे में विचार करना चाहिए।
विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करें सरकार
खतौली के ढाकन चौक निवासी रितिक पांचाल पुत्र बृजमोहन पांचाल ने कहा कि सरकार 20 हजार बच्चों का भविष्य अंधकार में ना डालें। मेडिकल के चार साल पूरे हो चुके हैं। उनके 30 से 35 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। सितंबर में लोगों की ऑनलाइन क्लासेस यूक्रेन में चालू होने वाली है। सरकार को सभी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करना चाहिए। उनके अभिभावक दोबारा यूक्रेन भेजने को तैयार नहीं है।