जनता से जुड़ने और उनकी समस्याओं को करीब से जानने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने डिजिटल वॉलेंटियर बनाने की योजना शुरू की। इसके तहत जिले में पुलिस के डिजिटल वॉलेटिंयर बनाए जाएंगे। दरअसल जिले में कई ऐसे मामले भी सामने आए है, इसमें किसी बड़ी घटना की शुरूआत सोशल मीडिया के एक मैसेज से हुई। अपने-अपने अनुभवों के आधार पर लोगों ने पुलिस से दूरी भी बना ली। इस दूरी को कम करने और संभ्रांत लोगों को जोड़कर पुलिस ने डिजीटल वॉलेंटियर बनाने की शुरूआत की है।
एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया जनपद का हर थाना 250 डिजिटल वॉलेंटियर बनाएगा। इससे तकरीबन ढाई हजार लोग पुलिस के डिजिटल वॉलेंटियर बन जाएंगे। डिजिटल वॉलेंटियर सोशल मीडिया में अफवाह फैलने से रोकेंगे और इलाके में होने वाली असामाजिक गतिविधियों के बारे में भी पुलिस को जानकारी देंगे। समाज के विभिन्न क्षेत्रों से ये डिजिटल वॉलेंटियर चुने जाएंगे। प्रक्रिया को पारदर्शी बनाकर डिजिटल वॉलेंटियर के लिए पुलिस थाने पर फॉर्म भरवाएगी। फॉर्म का सत्यापन एसपी स्तर का अधिकारी करेगा। उन्होंने बताया कि टीचर, प्रिंसिपल, रिटायर्ड फौजी, सेवा निवृत्त पुलिस कर्मी, पत्रकारों को डिजिटल वॉलेंटियर बनाने में प्राथमिकता दी जाएगी। यूपी पुलिस की वेबसाइट से डिजिटल वॉलेंटियर के फॉर्म डाउन लोड किए जा सकते हैं।
दरोगाओं को सौंपी गई जिम्मेदारी
जिले में हर तरह के अपराध होते हैं। हत्या, लूट, डकैती, बलात्कार की घटनाएं ज्यादा होती है। इस साल जनवरी से लेकर अब तक जिले में 50 से अधिक हत्याएं हो चुकी है। जिले के सभी थानों पुलिस ने डिजिटल वॉलेंटियर बनाने का काम शुरू कर दिया। बागपत, बड़ौत, खेकड़ा, छपरौली, रमाला, दोघट, बिनौली, बालैनी, सिंघावली अहीर, चांदीनगर थाने में 250-250 वॉलेंटियर बनाए जाएंगे।
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