एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हेड कांस्टेबल जयवीर सिंह को सस्पेंड कर दिया है। एसपी ने बताया कि कोतवाली प्रभारी आरके सिंह ने हेड कांस्टेबल को शव के अंतिम संस्कार के लिए साढ़े चार हजार रुपये भी दिए थे, लेकिन इसके बावजूद शव का अंतिम संस्कार टायरों से कर दिया। यह गलत है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकार की तरफ से भी लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए 2700 रुपये मिलते हैं। उन्होंने कहा कि शव का अंतिम संस्कार सम्मान से करना चाहिए। यदि कोई भी पुलिसकर्मी इस तरह का कृत्य करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लकड़ी जलाने के लिए जलाया टायर
हेड कांस्टेबल जयवीर सिंह का कहना है कि लकड़ियां गीली होने के कारण आग नहीं पकड़ रही थीं। इसलिए उसने लकड़ी जलाने के लिए गाड़ी के टायर का प्रयोग किया। आग लगाने के लिए गाड़ी का टायर जलाया गया था। जब लकड़ी में आग लग गई तो टायर हटा दिया था। उसने एसपी से लिखित में गलती भी मानी है।
सुधरने को तैयार नहीं पुलिस कर्मी
बागपत जिले में शव से दुर्गति का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी यमुना खादर में पुलिसकर्मियों द्वारा इसी तरह से लावारिस शवों का अंतिम संस्कार किया गया। लकड़ी की जगह कभी घास-फूंस तो कभी मिट्टी का तेल छिड़क कर शवों का अंतिम संस्कार किया जाता रहा है।
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