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यूपी: बदमाशों के आगे तमाशबीन पुलिस, कभी हथियारों ने दगा दिया, तो कभी हाथ से नहीं चली गोली

Sat, 22 Sep 2018 11:17 AM IST
गजेंद्र चौधरी , अमर उजाला, मेरठ
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खुद को हाईटेक बताने वाली मेरठ पुलिस में अभी और सुधार की जरूरत है। सर्विलांस के साथ-साथ पुलिस वालों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग समय-समय पर नहीं दी जाती। इसका खामियाजा पुलिसिंग में देखने को मिल रहा हैं। एक साल में बदमाशों ने पुलिस के सामने 28 आपराधिक वारदात की, जिसमें पुलिस बदमाशों के सामने गोली नहीं चला पाई। कभी हथियारों ने दगा दे दिया तो कभी पुलिस वाले गोलियां चलाने का साहस नहीं जुटा पाए। गंगानगर में बसपा छात्रनेता की हत्या पुलिस के सामने हुई। इसकी गूंज लखनऊ तक पहुंची तो शासन ने प्रदेश के जिलों का रिकॉर्ड मंगाया। जिन मामलों में चश्मदीद पुलिस वाले वारदात के दौरान गोली नहीं चला सके। 

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ट्रेनिंग नहीं देते

जनपद में पुलिस वालों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने के लिए मवाना रोड स्थित सैनी गांव के जंगल में तीन बीघे जमीन में सेंटर बना है। इसका बजट प्रदेश सरकार देती है। लेकिन इस ट्रेनिंग सेंटर में पुलिस कभी भी प्रेक्टिस के लिए नहीं आती। सेंटर पर सिर्फ नए लाइसेंस आवेदन वाले या फिर वरासत में लाइसेंसी हथियार लाने वालों से गोलियां चलवाकर देखी जाती हैं।

मोर्चे पर फेल पुलिस 
बदमाश पुलिस के सामने वारदात कर आसानी से फरार हो जाते हैं। वो गोलियां चलाते और पुलिस तमाशबीन बनकर देखती रहती है। सरकारी असलहे होने के बावजूद पुलिस बदमाशों से मोर्चा नहीं ले पाती। ऐसा अकेले मेरठ के गंगानगर में ही नहीं, मेरठ जोन की 28 बड़ी वारदातों में होना बताया गया। जबकि छोटी-छोटी वारदातों में तो ऐसी शिकायत अक्सर सुनने को मिलती रहती है।

निरीक्षण में खुलती है पोल 

सरकारी असलहे कैसे हैं और पुलिस उनको कैसे चलाती है। इसकी पोल कई बार पुलिस अफसरों के सामने निरीक्षण के दौरान खुल जाती है। हथियारों की हालत का अंदाजा मालखाने में जाकर देख सकते हैं। गोली चलाने की बात तो दूर, कई पुलिस वाले असलहे की तकनीकी जानकारी भी नहीं रखते। हथियारों को खोलने और बंद करने में भी उनके सामने दिक्कत खड़ी हो जाती है। 

आर्म्स पुलिस से ज्यादा दागी पुलिस 
पुलिस लाइन में आर्म्स पुलिस 24 घंटे मुस्तैद होती है। किसी बड़ी घटना या बदमाशों से रीयल मुठभेड़ में आर्म्स पुलिस को बुलाने का प्रावधान है। लेकिन ऐसा नहीं होता। मुठभेड़ या किसी भी घटना में इन आर्म्स पुलिस वालों को अक्सर भुला दिया जाता है। पुलिस लाइन में भी अब आर्म्स पुलिस से ज्यादा दागी पुलिस वाले हैं। 

फायरिंग रेंज की हालत खस्ता 
पुलिस के  फायरिंग रेंज की भी हालत बहुत खस्ता है। ट्रेनिंग सेंटर में कई बड़ी खामियां है। सफाई तो दूर की बात वहां पर पुलिस कभी जाती भी नहीं। इस फायरिंग रेंज की जमीन लगातार कम होती जा रही है। इस पर भी पुलिस का फोकस नहीं है। वहां पर जाने का रास्ता भी बहुत खराब है।
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इनसे भी नहीं लिया सबक  

गंगानगर में छात्रनेता गुड्डू चौधरी की हत्या पुलिस के सामने हुई। हस्तिनापुर के अलीपुर मोरना में सिपाही सो रहा था और गोलियां चलती रहीं। बागपत में पुलिस वालों से हथियार छीनकर अमित भूरा को बदमाश छुड़ाकर ले गए थे। इसके अलावा अक्सर पुलिस वालों के सामने आपराधिक घटना होने की खबर आती रहती है।

मामले की जांच कराई जाएगी 
सर्विलांस के साथ-साथ पुलिस को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है। इसकी जिम्मेदारी पुलिस लाइन के इंचार्ज आरआई की है। फायरिंग रेंज में पुलिस को गोली चलाने की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो मामले की जांच कराई जाएगी। 
-प्रशांत कुमार, एडीजी मेरठ जोन 
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