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यूपी पीसीएस रिजल्ट: मेरठ की बेटियों ने मारी बाजी, जानें ज्योति धामा, देविका, ज्योति व रितु की कामयाबी की कहानी

Tue, 31 Mar 2026 08:58 AM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

Meerut News: यूपी पीसीएस में हस्तिनापुर के इकवारा गांव की ज्योति धामा, जानीखुर्द विकास खंड के ढिंडाला गांव की देविका कुंडु, कंकरखेड़ा निवासी छात्रा ज्योति और मेरठ की रितु सिंह ने कामयाबी हासिल की है। 
 
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ज्योति धामा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बेटियां किसी से कम नहीं। इस कथन को एक बार फिर सच साबित करते हुए होनहार बेटियों ने उत्तर प्रदेश सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा (यूपी पीसीएस) में शानदार प्रदर्शन कर इतिहास रच दिया। मेरठ की मिट्टी में जन्मीं इन बेटियों की यह कहानी सिर्फ सफलता की दास्तान नहीं बल्कि हौसलों की वह उड़ान है जिसमें हर बाधा छोटी पड़ जाती है। साधारण परिवारों से निकलकर असाधारण उपलब्धियां हासिल करने वाली इन बेटियों को मेरठ जिले का प्रणाम।
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ज्योति धामा। - फोटो : अमर उजाला
ज्योति धामा: संघर्ष से शिखर तक का सफर
यूपी पीसीएस के अंतिम परिणाम में हस्तिनापुर के इकवारा गांव की ज्योति धामा ने शानदार 19वीं रैंक हासिल की है। ज्योति के चयन की खबर मिलते ही परिवार और गांव में जश्न का माहौल बन गया। परिजनों और ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। वह मंगलवार को अपने गांव पहुंचेंगी। ज्योति धामा की प्रारंभिक शिक्षा हस्तिनापुर के सरस्वती विद्या मंदिर से हुई। इसके बाद उन्होंने मवाना के एएसपीजी कॉलेज से बीएससी (गणित) की पढ़ाई पूरी की और डाइट छोटा मवाना से डीएलएड उत्तीर्ण किया। शुरुआत में उनका रुझान शिक्षण क्षेत्र की ओर था, लेकिन सहपाठी आंचल के प्रोत्साहन से उन्होंने पीसीएस परीक्षा की तैयारी शुरू की। 

ज्योति ने प्रारंभिक तैयारी मवाना के मनोज व मुकेश इंस्टीट्यूट से की, लेकिन बाद में स्वाध्याय के बल पर सफलता हासिल की। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने परिवार, खासकर मित्र आंचल को दिया है। ज्योति के पिता जयवीर सिंह एक साधारण किसान हैं, जबकि माता गीता गृहिणी हैं। परिवार में बड़े भाई सचिन धामा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। छोटी बहन प्रिया धामा दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं, शिवानी धामा बीए ऑनर्स की छात्रा हैं और सबसे छोटे भाई निखिल धामा कक्षा 12 में पढ़ रहे हैं।
 

देविका। - फोटो : अमर उजाला
देविका कुंडु: पहली ही कोशिश में सफलता की मिसाल
जानीखुर्द विकास खंड के ढिंडाला गांव की देविका कुंडु ने 114वीं रैंक हासिल कर वाणिज्यिक कर अधिकारी का पद प्राप्त किया। उनकी कहानी संघर्ष, धैर्य और दृढ़ निश्चय का उत्कृष्ट उदाहरण है। आर्थिक तंगी के बावजूद उनके पिता ने उन्हें सिविल सेवा की तैयारी के लिए प्रेरित किया। देविका ने पहले तीन बार यूपीएससी की परीक्षा दी लेकिन असफलता मिली। उन्होंने हार नहीं मानी और रणनीति बदलते हुए यूपीपीएससी की तैयारी शुरू की। 

पहले ही प्रयास में मिली सफलता ने यह साबित कर दिया कि असफलता केवल सफलता की सीढ़ी होती है। नियमित अध्ययन, अनुशासन और परिवार का सहयोग उनकी सफलता की कुंजी बना। मां ममता देवी ने बेटी को मिठाई खिलाकर आशीर्वाद दिया। देविका ने बताया कि पिता खेती के काम के बावजूद उनका मार्गदर्शन करते रहे और उन्होंने परीक्षा से पहले रोजाना छह घंटे की नियमित पढ़ाई की।

ज्योति। - फोटो : अमर उजाला
शादी के बाद भी सपनों को नहीं छोड़ा
कंकरखेड़ा निवासी छात्रा ज्योति ने भी 114वीं रैंक हासिल कर कमर्शियल टैक्स अधिकारी बनने में सफलता पाई। ज्योति शादीशुदा हैं और परीक्षा के समय प्रेग्नेंट थीं। शारीरिक तकलीफ के बावजूद उन्होंने लखनऊ जाकर परीक्षा दी। वर्तमान में सरधना में लेखपाल के पद पर कार्यरत ज्योति परिवार की जिम्मेदारियों के बीच भी लगातार तैयारी करती रहीं। उन्होंने चार बार पहले असफलता का सामना किया लेकिन हार नहीं मानी। आरजी पीजी कॉलेज से बीएससी और सीसीएसयू से एमएससी तथा एमफिल (माइक्रोबॉयोलॉजी) करने वाली ज्योति का लक्ष्य अब एसडीएम बनना है। वे यूपी पीसीएस 2025 की मुख्य परीक्षा भी दे रही हैं।
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रितु। - फोटो : अमर उजाला
सिविल एकेडमी की दो छात्राएं भी चमकीं
मेरठ की रितु सिंह ने 196वीं रैंक और साक्षी ने 146वीं रैंक हासिल कर नायब तहसीलदार बनने का गौरव हासिल किया है। साक्षी के पिता रवींद्र यादव कम्युनिटी सेंटर में वार्ड बॉय के पद पर कार्यरत हैं, जबकि मां मुनेश गृहिणी हैं। रितु सिंह के पिता स्वदेश कुमार रिटायर प्रॉसीक्यूशन ऑफिसर हैं और मां राजेश्वरी देवी गृहिणी हैं। रितु सिंह का लक्ष्य यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा है और वे इसकी तैयारी में जुट गई हैं।
 
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