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आयुर्वेद महासम्मेलन: वैद्य ताराचंद बोले- सेहतमंद रहना है तो मोटा अनाज खाएं, इन चीजों से दूरी बनाने को कहा...

Tue, 14 Mar 2023 12:37 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ आयुर्वेद महासम्मेलन : वैद्य ताराचंद शर्मा का कहना है कि सेहतमंद रहना है तो मोटा अनाज खाएं। साथ ही इन चीजों से दूरी बनाने को कहा...।
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नाड़ी वैद्य ताराचंद शर्मा ने बताया कि सेहतमंद रहना है तो मोटा अनाज (जौ, ज्वार, बाजरा, रागी ज्वार, रागी, सावां, कंगनी, कुटकी और कुट्टू आदि) खाएं। गेहूं, चावल और मीठे से दूरी बनाएं।

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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में आयुर्वेद महासम्मेलन के तीसरे और अंतिम दिन सोमवार को आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने अपने अनुभव और आयुर्वेद चिकित्सा के बारे में बताया। मुख्य अतिथि दिल्ली से आए वैद्य ताराचंद शर्मा आयुर्वेद पर 12 किताबें लिख चुके हैं। दिल्ली सरकार उन्हें आयुर्वेद पर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दे चुकी है। उन्होंने बताया कि पहले गेहूं को धोकर सुखाया जाता था, उसके बाद मोटा पीसकर खाया जाता था। अब गेहूं को धोया नहीं जाता, बारीक पीसा जाता है, उसकी गर्मी खत्म नहीं होती, जिससे मधुमेह जैसी बीमारियां हो रही हैं। स्वस्थ रहें, मोटे न हों। गेहूं और चावल खाने से मोटे होते हैं, सेहतमंद नहीं। गाय का दूध पीएं और तन मन को प्रसन्न रखें। व्यायाम करें। 

उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से आयुर्वेद को बढ़ावा मिलेगा। यह विश्व में और फैलेगा। आयुर्वेद महासम्मेलन के अंतिम दिन ओपीडी में आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने 500 से ज्यादा मरीजों को परामर्श दिया। सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में वैज्ञानिक सत्र में आयुर्वेद के छात्र-छात्राओं को आयुर्वेद से संबंधित जानकारी दी गई। खुर्जा के वीवाईडीएस आयुर्वेद कॉलेज की प्रोफेसर स्नेहलता ने सुवर्ण प्राशन पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। बच्चों के लिए इसके इस्तेमाल के लाभ बताए। डॉ. अश्विनी गौतम ने कहा कि छात्र छात्राओं से कहा कि आयुर्वेद पर विश्वास करें, भविष्य में आयुर्वेद बहुत आगे जाएगा। डॉ धीरज मोहन शर्मा ने क्षात्र सूत्र और फिस्टुला के बारे में जानकारी दी। क्षार सूत्र पद्धति से ठीक हुआ पाइल्स दुबारा नहीं होता तथा भगंदर आदि रोग जड़ से मिट जाते हैं।
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खराब दिनचर्या है बीमारी का कारण
वैद्य सुनील आर्य ने कहा कि अब बीमारी का बड़ा कारण दिनचर्या खराब होना है। जब सोना चाहिए तब जागते हैं, जब जागना चाहिए तब सोते हैं। आजकल एच3एन2 वायरस से खांसी बुखार हो रहा है। इसका इलाज उन्होंने बताया कि अगर गाय के एक चाय के चम्मच घी में अजवाइन, सौंठ और हल्दी (तीनों मिलाकर आधा चाय की चम्मच) को मिलाकर उसका झौंक एक गिलास गाय के दूध में लगाकर उसे चार से पांच दिन पी लिया जाए तो पता भी नहीं चलेगा खांसी कहां गई। बिल्कुल ठीक हो जाएगी।

मोबाइल के दौर में अक्षी तर्पण से करें आंखों की हिफाजत
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. प्रीति छाबड़ा ने कहा कि अब मोबाइल और कंप्यूटर का दौर है। ऐसे में आंखों की समस्याएं पैदा हो रही हैं। आंखों की हिफाजत के लिए आयुर्वेद में अक्षी तर्पण (नेत्र देखभाल उपचार) का इस्तेमाल किया जा सकता है। अक्षी तर्पण का उपयोग आंखों की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए किया जाता है। इसके तहत आंखों को गुनगुने पानी से धोने के बाद रूई से अच्छी तरह सुखाया जाता है। इसके बाद आंखों पर घी इकट्ठा करने के लिए चारों ओर उड़द के आटे की दीवारें बनाई जाती हैं। शरीर के तापमान के बराबर गुनगुने (नीम गर्म) घी को नाक के ऊपर से धीरे-धीरे टपकाया जाता है जो आंखों के चारों ओर इकट्ठा होता रहता है। इसके बाद मरीज आंखें खोलता और बंद करता है। इस घी के ठंडा होने पर फिर नीम गर्म घी डालते हैं, ऐसा तीन बार होता है। अंत में आंखें गर्म पानी से धोकर 10-15 मिनट तक आराम करना चाहिए।
 
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आयुर्वेदाचार्यों समेत 100 लोगों को किया गया सम्मानित, 19 शोध पत्र प्रस्तुत
महासम्मेलन के समापन कार्यक्रम में आयुर्वेदाचार्यों समेत 100 लोगों को सम्मानित किया गया। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा, राजस्थान, मध्यप्रदेश और हरियाणा आदि से आए 50 आयुर्वेद के चिकित्सकों को सम्मानित किया गया। महासम्मेलन के पदाधिकारियों डॉ. ब्रजभूषण शर्मा और वैद्य गोपाल दत्त, वैद्य अवधेश श्रीवास्तव और क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी रेणु चौधरी समेत 15 लोगों के सम्मानित किया गया। इनके अलावा औद्योगिक इकाइयों, आयुर्वेद के कॉलेजों और स्टॉल लगाने वालों 35 प्रतिनिधियों को भी सम्मान में शॉल, मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र दिए गए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एमएलएसी धर्मेंद्र भारद्वाज रहे। वहीं, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में 20 छात्र-छात्राओं का सम्मान किया गया। तीन दिनों में 19 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। तीन दिन में 2500 मरीजों को ओपीडी में देखा गया। 12 वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए।

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