मेरठ पुलिस ने एसएसपी के निर्देश पर गोतस्करों का सत्यापन शुरू किया तो अस्सी गोतस्कर अपने-अपने घरों से गायब मिले। पुलिस का दावा कि एनकाउंटर के डर से तस्कर दूसरे शहरों में चले गए, जहां पर वह नौकरी कर रहे है। इन तस्कर की गतिविधि कहां और क्या चल रही, इसकी जांच कराई जा रही है। इसको लेकर पुलिस की एक टीम तस्करों के उन ठिकानों पर भी छापामारी कर रही है, जहां पर उनका नौकरी करना बताया गया है।
मुकदमे में नाम, दबिश में गायब
मेरठ जनपद में पांच साल में करीब 1898 गोवध अधिनियम के तहत मुकदमे पंजीकृत हुए। जिनमें करीब छह हजार लोगों को मुल्जिम बनाया गया। इन मुकदमों में कई लोगों के नाम अलग अलग मुकदमे में तीन-चार बार लिखे हैं। गोकशी करने वाले और गोतस्करों के खिलाफ पुलिस का अभियान चला। जिसमें खुलासा हुआ कि 80 गोतस्करों के मुकदमे में नाम हैं, लेकिन पुलिस की दबिश में वे अपने घरों से गायब बताए गए हैं।