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यूपी: प्रधानमंत्री का सपना पूरा करेगी खंडहर पड़ी मेरठ कताई मिल 

Mon, 27 Aug 2018 04:19 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
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वर्ष 1999 से बंद पड़ी परतापुर कताई मिल में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अफोर्डेबल हाउस बनाने का सपना साकार हो सकेगा। एमडीए ने इस बाबत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। कहा है कि टुकड़ों में जमीन लेने से कहीं ज्यादा बेहतर है कि इस जमीन पर ही अफोर्डेबल हाउस बनाए जाएं। जानें कैसे पीएम मोदी के सपने को साकार करेगी मेरठ की यह कताई मिल :-

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बनेंगे दस हजार आवास

इस योजना के तहत एमडीए को दस हजार आवास बनाने हैं। एक हजार आवास बनाने को फिलहाल निजी बिल्डर तैयार हैं। एक हजार आवास शताब्दीनगर तथा अन्य योजनाओं में तैयार हो रहे हैं। बाकी आठ हजार आवासों के लिए एमडीए लगातार मशक्कत कर रहा है पर जमीन नहीं मिल रही है।

परतापुर बराल में जरूर कुछ जमीन एमडीए के नाम हुई है पर उससे काम चलने वाला नहीं है। अन्य दो गांवों में भी जमीन की तलाश की गई पर सफलता नहीं मिल पाई। लगभग आठ हजार आवास बनाने के लिए जमीन चाहिए, पर ये जमीन के लिए कुछ खर्च न हो। या तो यह जमीन सरकारी हो या किसी विभाग की। तभी यह सपना साकार हो सकता है। नियमों में यही कहा गया है कि जमीन खरीदी न जाए। 

परतापुर कताई मिल फिलहाल खंडहर है। यहां केवल चुनाव केदौरान मतगणना होती है। एमडीए वीसी ने इस बाबत शासन में बात की है। कहा है उप्र राज्य वस्त्र निगम की इस मिल की जमीन को प्रधानमंत्री आवास के लिए लिया जा सकता है। जितनी आवश्यकता होगी उतनी जमीन पर आवास बना लिए जाएंगे। यदि जरूरत हुई तो दूसरी तरफ इंडस्ट्रियल कलस्टर भी डेवलप किया जा सकता है। चूंकि जमीन किसी की निजी नहीं है, सरकारी महकमे की है तो इसे एमडीए को दिया जा सकता है। इस बाबत डीएम अनिल ढींगरा से भी बात की है। उन्होंने भी इस पर हरी झंडी दे दी है। इस बाबत सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है।
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कभी कमाऊ कारखानों में शामिल थी

यह मिल 81 एकड़ के विशाल परिसर में फैली है। किसी जमाने में मेरठ की यह कताई मिल सूबे के कमाऊ कारखानों में शामिल थी। बाद में सरकारी उपेक्षा की मिल इस कदर शिकार हुई कि बंद हो गई। अब यह वर्ष 1999 से बंद पड़ी है। खंडहर में तब्दील हो रही है। हालांकि समय-समय पर सरकारों द्वारा प्रयास किए जाते रहे हैं किंतु संचालन की दिशा में अभी तक सफलता नहीं मिली है। इसकी उम्मीद भी कम ही है।

इस मिल परिसर में काफी जमीन है और इसके दाम भी आज आसमान पर हैं। हालांकि 2001 में तत्कालीन सरकार के निर्देश पर कताई मिल की वेल्यूशन निकलवाई गई थी तो वहीं कॉरपोरेशन ने 2011 में गाजियाबाद की एक प्राइवेट एजेंसी से मेरठ के कताई मिल की वैल्यू का आंकलन कराया था. तब इसकी वैल्यू करीब 250 करोड़ आंकी गई थी। अब इसकी कीमत लगभग एक हजार करोड़ आंकी जा रही है।

एमडीए के वीसी साहब सिंह के अनुसार  हमने सरकार में बात कर ली है। वहां से सकारात्मक जवाब आया है। यदि यह जमीन मिल जाती है तो प्रधानमंत्री आवास योजना पर काम करना आसान होगा। एक ही जगह आवास बनेंगे। 
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