आरोप लगाया था कि वैभव जैन ने अपने मित्र के साथ मिलकर कंपनी में घपला किया, जिसके बारे में कंपनी के चालक ने बताया।
वैभव जैन कंपनी के मिल से ट्रकों में माल लोड करवा रिकार्ड में दर्ज किए बिना ही वहां से निकलवा देता। कंपनी के आंतरिक ऑडिट में दो तीन साल में किए गए 28 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पता चला। आरोप है कि इसमें पिता सतीश जैन और उनकी फर्म मेसर्स अतरसेन की भूमिका भी सामने आई। इसमें मुकदमा दर्ज करके जांच अपराध शाखा को सौंपी गई थी।
अब यहां से भी जांच को मेरठ की अपराध शाखा के पास ट्रांसफर किया गया। एएसपी नरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार जांच को मेरठ की अपराध शाखा से कराया जाएगा और उसमें जिस तरह के तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे कार्रवाई होगी।