एसटीएफ ने शुक्रवार को बोगस फर्मों व फर्जी बिल काटकर 500 करोड़ की जीएसटी चोरी करने वाले गिरोह का राजफाश किया है। मेरठ के स्क्रैप कारोबारी समेत आठ आरोपियों को मेरठ से गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के पास से 90 फर्मों की मुहर, 54 बैंक पासबुक, 24 फर्मों की बिलिंग फाइलें और 125 बोगस फर्मों का डाटा लैपटॉप से बरामद हुआ। गिरोह ने लखनऊ के पते पर भी छह फर्जी फर्में पंजीकृत करवाकर करोड़ों का हेरफेर किया है।
एसटीएफ के डिप्टी एसपी प्रमेश कुमार शुक्ल ने बताया कि आगरा के लोहामंडी थाने में जीएसटी की तरफ एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। केस की तफ्तीश में एसटीएफ की टीम भी लगी थी। साक्ष्यों के आधार पर मेरठ के स्क्रैप कारोबारी दिलशाद मलिक, उसकी कंपनी के कर्मचारी मोहम्मद वसीम, मोहम्मद सोहेल, जावेद मलिक, इकरामुद्दीन, नोएडा के अंकुर तिवारी (मूल निवासी अंबेडकरनगर), गाजियाबाद (मूल निवासी अंबेडकरनगर) के स्वतंत्र कुमार तिवारी और दिल्ली (मूल निवासी देवरिया) के रमेश पटेल को गिरफ्तार किया गया है। रमेश भी दिलशाद के साथ स्क्रैप का काम करता है।
तीन दफ्तर बनाए थे, इस तरह किया फर्जीवाड़ा
दिलशाद तीन दफ्तर संचालित कर रहा था। दो दफ्तर मेरठ व एक गाजियाबाद में बनाया था। यहीं से आरोपी फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे थे। आरोपी बोगस फर्मों का पंजीकरण करवाते थे। फिर बोगस इनवाइस व ई-वे बिल तैयार कर वास्तविक फर्मों को बेचकर करोड़ों का राजस्व पार कर रहे थे।
लखनऊ में इन फर्मों का कराया गया रजिस्ट्रेशन
गिरोह ने लखनऊ में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जिन बोगस फर्मों का रजिस्ट्रेशन कराया, उनमें हर्ष ट्रेडर्स, इंटर इंटरप्राइजेज, आरके इंटरप्राइजेज, राहुल इंटरप्राइजेज, मार्शल इंपैक्स व कुमार ट्रेडर्स शामिल हैं। इन फर्मों के जरिये सर्कुलर ट्रेडिंग करते हुए खुद की और अन्य वास्तविक फर्मों को लाभ पहुंचाया गया और करोड़ों की जीएसटी चोरी की गई।
एक फर्म से 137 करोड़ की कर चोरी
डीएसपी ने बताया कि आरोपियों ने आगरा के पते पर शर्मा इंटरप्राइजेज की फर्जी फर्म रजिस्टर्ड कराई। सिर्फ इस एक फर्म से 137 करोड़ रुपये की कर चोरी की गई। अंदाजा लगाया जा सकता है कि सैकड़ों फर्मों के माध्यम कितना अधिक राजस्व का नुकसान किया है। तफ्तीश में सामने आया कि दिलशाद और रमेश की वास्तविक फर्में भी हैं। वास्तविक व फर्जी फर्मों के जरिये पूरा खेल जारी था।
करीब 20 राज्यों में नेटवर्क
डीएसपी के मुताबिक आरोपियों ने यूपी, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, झारखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार और असम समेत करीब 20 राज्यों में आरोपियों का नेटवर्क है। इन राज्यों के अलग-अलग शहरों के पतों पर बोगस फर्में पंजीकृत हैं। इसके पहले एसटीएफ ने कानपुर व बलरामपुर जिले के पतों पर दर्ज बोगस फर्मों का खुलासा कर गिरोह का भंडाफोड़ किया था।
इस तरह आरोपियों तक पहुंची एसटीएफ
एसटीएफ के मुताबिक फर्म पंजीकरण से लेकर जीएसटी भरने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। जिसमें ई-मेल व मोबाइल नंबर का इस्तेमाल होता है। जांच में फर्मों में इस्तेमाल ई-मेल आईडी की जानकारी जुटाई गई। फिर आईपी एड्रेस व अन्य जानकारी के जरिये रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का पता किया गया, जिससे आरोपियों तक एसटीएफ पहुंची।
गिरफ्तार किए गए आरोपी
- दिलशाद मलिक, मेरठ
- रमेश पटेल, अशोक नगर दिल्ली (मूलनिवासी देवरिया)
- अंकुर तिवारी, नोएडा (मूलनिवासी अंबेडकरनगर)
- स्वतंत्र कुमार तिवारी, गाजियाबाद (मूलनिवासी अंबेडकरनगर)
- मो. वसीम, मेरठ
- मो. सोहेल, मेरठ
- जावेद मलिक, मेरठ
- इकरामुद्दीन, मेरठ