दरोगा पर कार्रवाई के नाम पर चुप्पी क्यों?
होटल मालिक (भाजपा पार्षद) को जेल भेजने और दरोगा पर कार्रवाई न करने को लेकर भाजपाइयों और व्यापारियों में पुलिस के प्रति गुस्सा है। दरोगा के साथ होटल में मौजूद रही महिला वकील पर मेरठ व जिला बार एसोसिएशन ने बड़ी कार्रवाई कर दी। लेकिन पुलिस अधिकारी दरोगा के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साधे बैठे हैं। यह प्रकरण अब मुख्यमंत्री तक पहुंच गया और शासन ने रिपोर्ट तलब कर ली है।
इस पूरे प्रकरण पर सोशल साइटों पर मेरठ पुलिस के खिलाफ भाजपा नेता व व्यापारी पोस्ट डाल रहे हैं, जिससे मेरठ पुलिस की किरकिरी हो रही है। व्यापारियों ने 29 अक्तूबर को मेरठ बंद करने का ऐलान भी किया हुआ है। इसके बावजूद आला अधिकारी दरोगा की गलती मानने को तैयार नहीं हैं। जबकि सार्वजनिक स्थल पर पुलिस वर्दी में दरोगा का आचरण पूरी तरह से आपत्तिजनक और पुलिस की साख पर बट्टा लगाने वाला है। जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, उसमें दरोगा अनुचित आचरण के लिए दोषी माना जा रहा है। वहीं, भाजपा और व्यापारियों के आक्रोश का मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा तो मामला गंभीर होने के चलते लखनऊ ने मेरठ पुलिस से इस प्रकरण की सारी रिपोर्ट तलब कर ली।
हो सकता है एक्शन
पुलिस ने इस केस में डकैती की धारा गलत तरीके से लगाने की बात मान ली। कोर्ट में इसकी अर्जी दाखिल कर दी। लेकिन दरोगा पर कार्रवाई न करने को लेकर अधिकारी भी संदेह के घेरे में हैं। शुरूआती प्रकरण के बारे में उच्चाधिकारियों को बताया गया था कि मामला खाकी की बदनामी से जुड़ा है। क्योंकि भाजपा पार्षद सरेआम दरोगा को थप्पड़ मार रहा है। लेकिन उसके बाद वायरल वीडियो में दरोगा के दावे झूठे निकलने शुरू हुए तो सब कुछ सामने आने पर भी अधिकारी खामोश है। इस मामले में लखनऊ से एक्शन हो सकता है।
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