सकौती स्थित हितकारी किसान इंटर कॉलेज में महाराजा सूरजमल की प्रतिमा के अनावरण के बाद जाट शब्द हटाने को लेकर हुए विवाद के बाद मेरठ पुलिस ने सोशल मीडिया पर बयान जारी किया है। पुलिस ने बयान में कहा कि जाति-सूचक शब्द हटाने की कार्रवाई किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के संदर्भ में की गई है।
रविवार को महाराजा सूरजमल की प्रतिमा के अनावरण पर ‘जाट’ शब्द हटाए जाने पर जाट समाज के लोगों और अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के पदाधिकारियों ने हंगामा करते हुए धरना दिया था। लोगों ने इसे समाज की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताते हुए तत्काल शब्द दोबारा अंकित करने की मांग की थी। प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाने का प्रयास किया। काफी देर तक चली वार्ता के बाद अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि 15 दिन के अंदर आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी कर ‘जाट’ शब्द दोबारा लगवाया जाएगा। इस पर सहमति बनने के बाद धरना समाप्त कर दिया गया था।
अब सोशल मीडिया पर जारी बयान में मेरठ पुलिस ने कहा कि महापुरुष पूरे राष्ट्र के प्रेरणा स्रोत होते हैं और उन्हें किसी जातीय दायरे में बांधना उचित नहीं है। पुलिस के अनुसार, प्रतिमा स्थल से जाति-सूचक शब्द हटाने की कार्रवाई किसी एक समुदाय के विरुद्ध नहीं है, बल्कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 16 सितंबर 2025 के आदेश (प्रवीण छेत्री बनाम स्टेट ऑफ यूपी) के संदर्भ में आयोजकों द्वारा स्वेच्छा से की गई है। इसके वीडियो साक्ष्य भी उपलब्ध हैं। हालांकि, समाज के लोगों का कहना है कि महाराजा सूरजमल की पहचान से ‘जाट’ शब्द जुड़ा है, इसलिए इसे हटाना उचित नहीं है।